मकर संक्रांति का पुण्य काल 16 घंटे का होगा लेकिन स्नान-जप और दान के लिए लोगों के पास सवा सात घंटे ही होंगे। 15 जनवरी को सुबह से दोपहर के 1.39 बजे तक का समय पुण्य प्राप्ति के लिए ज्यादा लाभकारी होगा। हालांकि, मकर संक्रांति 14 जनवरी को रात 9:39 बजे ही लगेगी लेकिन संक्रांति का पुण्यकाल सूर्योदय के बाद ही मान्य होगा।
बीएचयू में ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि सूर्य सिद्धांत की ग्रह गणना पद्धति के अनुसार तिथि निर्धारित की गई है। मकर राशि में सूर्य के संक्रमण काल का पुण्यकाल रात्रि में संक्रांति होने पर संक्रांति के बाद की 40 घटी तक यानी कि 16 घंटे का होता है। लेकिन, रात में संक्रांति के स्नान दान आदि कर्म नहीं किए जा सकते।
सूर्य सहित सभी ग्रहों के 12 राशियों में भ्रमण करने के कारण हर महीने में सभी ग्रहों की संक्रांति होती रहती हैं लेकिन उन सभी ग्रहों की सूर्य की संक्रांति विशेष पुण्यदायी होती है। उन सूर्य की अन्य संक्रांति में भी मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। क्योंकि, यहां से देवताओं की दिन की तरफ प्रवृत्ति लगती है। इसलिए इसका विशेष महत्त्व शास्त्रों में वर्णित है।