दालमंडी में चोरी छिपे बेसमेंट बनाए जाने का मामला इकलौता नहीं है। चौक थाना क्षेत्र में दालमंडी सहित अन्य इलाकों में ऐसे 40 अवैध बेसमेंट और बनाए गए हैं। प्रशासन ने मामले में मजिस्ट्रेटी जांच शुरू करा दी है। जांच के दायरे में आधा दर्जन विभागों के करीब एक दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों के संलिप्त होने की आशंका है। जिलाधिकारी की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. विश्राम को जांच अधिकारी बनाया गया है।
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प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि दालमंडी जैसे सघन इलाके में आठ हजार वर्ग फीट एरिया में बेसमेंट सहित प्रथम तल का निर्माण हो गया। काफी लंबे समय से निर्माण कराया गया लेकिन इस पर न तो वीडीए की नजर पड़ी और न ही नगर निगम की। नगर निगम ने गृहकर वसूलने केदौरान भी इसपर ध्यान नहीं दिया। वहीं, बिजली विभाग, थाने की पुलिस, एलआईयू ने भी इसे नजर अंदाज किया।
वहीं, इतने बड़े भूभाग के बेसमेंट की मिट्टी खोदकर पार कर दी गई और खनन विभाग को पता तक नहीं चला। जांच में यह भी पता चला कि दालमंडी इलाके में एक ही बेसमेंट नहीं बल्कि 40 बेसमेंट का निर्माण करा दिया गया और इस पर निगरानी रखने वाले वीडीए के जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ी।
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माना जा रहा है कि जांच में कई विभागों के एक दर्जन अधिकारी इसके दायरे में होंगे। जांच में और भी तथ्य सामने आए हैं, इसमें दालमंडी इलाके में बिना लाइसेंस के कुक्कुट पालन से लेकर मीट की कई दुकानें संचालित हैं।
पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
अवैध निर्माण पर कार्रवाई के विरोध में बंद की दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
दालमंडी में अवैध निर्माण के खिलाफ वीडीए, पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद वृहस्पतिवार को अवैध भवनों एवं निर्माण का सर्वे करने गई वीडीए की टीम और पुलिस को विरोध का सामना करना पड़ा। नाराज दुकानदारों ने दोपहर में दुकानें बंद कर, वीडीए, पुलिस और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सर्वे बंद करो, टीम वापस जाओ के नारे लगाए। टीम ने पहले दिन दालमंडी सहित आसपास के इलाके में 18 अवैध निर्माण को चिह्नित किया है। अब वीडीए इनके खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है।
बुधवार को कार्रवाई के बाद वीडीए वीसी राजेश कुमार के निर्देश पर तहसीलदार अविनाश कुमार की अगुवाई में 10 सदस्यीय टीम ने दालमंडी सहित आसपास के इलाकों में बने भवनों का सर्वे किया। जिसमें यह जानकारी हासिल की गई कि कितने नए निर्माण हुए है और कहां-कहां बेसमेंट बना है।
साथ ही नए निर्माण में कितने भवन स्वामियों ने वीडीए से नक्शा स्वीकृत कराया है। वहीं सर्वे के दौरान दुकानदारों में नाराजगी थी कि बेसमेंट निर्माण केनाम पर बड़ा मामला बनाया जा रहा है। जबकि मौजूद भूभाग पर ही निर्माण कराया गया है।
आरोप लगाया कि इसे तूल दिया जा रहा है। दालमंडी में दुकानदारों के इकट्टा होने, नारेबाजी करने की सूचना मिलते ही दालमंडी मार्ग पर शांति एवं सुरक्षा के मद्देनजर काफी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई।
इस दौरान दुकानदारों ने करीब डेढ़ घंटे तक आधे से अधिक दुकानें बंद कर दी। लगभग साढ़े तीन बजे फिर से दुकानें खोल दी गई। इसके बाद दालमंडी बाजार का माहौल सामान्य हुआ।
दालमंडी में तीन अवैध निर्माण सील, दो सुपरवाइजर सस्पेंड,
- फोटो : अमर उजाला
दालमंडी इलाके में अवैध बेसमेंट निर्माण का खुलासा होने के इतने बड़े भूभाग की मिट्टी कहां, कैसे और कब हटा दी गई, इसकी भनक न तो खनन विभाग को लगी और न ही स्थानीय थाने की पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाई को। इसे लेकर अधिकारी भी हैरान हैं कि सैकड़ों ट्राली मिट्टी को हटा दिया गया, इसकेबाद भी किसी की नजर नहीं पड़ी। चर्चा तो यह भी रही कि कुछ मिट्टी को रात में हटाया गया बाकी मिट्टी को सीवेज पाइप लाइन के रास्ते बहा दिया गया।
नगर निगम निरस्त करेगा मकान नंबर
वाराणसी। अवैध निर्माण का मामला सामने आने के बाद नगर निगम भी सतर्क हो गया है। नगर निगम अब इंतजार कर रहा है कि अवैध भवन घोषित होता है तो उसे खाली प्लाट के रूप में दर्ज कर दिया जाएगा और जारी मकान नंबर को निरस्त कर दिया जाएगा। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि भवन का कोई कर बकाया नहीं है।
वीडीए करे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई: कमिश्नर
अवैध बेसमेंट निर्माण कार्य मामले में कमिश्नर और वीडीए के चेयरमैन नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया कि इस प्रकरण ध्वस्तीकरण वाद में कोई स्टे आदेश पारित नही है। जबकि संबंधित उक्त वाद में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने आगे की तिथि ले ली। उन्होंने बताया कि वाद के नियत नौ तिथियों के दौरान अधिवक्ता लोग न्यायिक कार्य से विरत रहे। उन्होंने बताया कि जब उक्त प्रकरण में कोई स्टे आदेश पारित नहीं रहा तो विकास प्राधिकरण को ध्वस्तीकरण की कार्यवाई की जानी चाहिए। उन्होंने विकास प्राधिकरण को उस अवैध निर्माण कार्य को ध्वस्त करने और एसएसपी को फोर्स उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।