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Varanasi News: सुर और शब्दों के संगम के साथ महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल का समापन

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कबीरा फेस्टिवल में गायन की प्रस्तुति करते आदित्य प्रकाश एन्सेम्बल । अमर उजाला
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कबीर के शब्दों और सुरों से सजे महिंद्रा कबीरा फेस्टिवल का यादगार समापन रविवार को हुआ। 15वीं सदी के रहस्यवादी कवि कबीर के जीवन, दर्शन और आज के समय में उनकी प्रासंगिकता को हर किसी ने महसूस किया। उत्सव के दौरान गंगा के घाट संगीत, संवाद और आत्मचिंतन के जीते-जागते केंद्र के रूप में नजर आए।
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महिंद्रा समूह और टीमवर्क आर्ट्स की ओर से आयोजित उत्सव में रविवार को दिन की शुरुआत गुलेरिया कोठी में सबलाइम मॉर्निंग्स के साथ हुई। श्रोताओं ने तेजस्विनी वर्नेकर के हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन और ख्याल की प्रस्तुति का रसास्वादन किया। तेजस्विनी ने राग अहीर भैरव में विलंबित और द्रुत की बंदिशों में कबीर के भजनों को पेश किया। इसके बाद देबस्मिता भट्टाचार्य ने सरोद पर सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इवोकेटिव आफ्टरनून्स सत्रों में संवादों ने उत्सव को वैचारिक रूप से समृद्ध किया।
पुरुषोत्तम अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत निज ब्रह्म विचार : रिफ्लेक्शन ऑन द ट्रूथ में कबीर के विचारों, आध्यात्मिक जिज्ञासा और समकालीन प्रासंगिकता पर गहरी अंतर्दृष्टि सामने आई। समापन सत्र में शिवाला घाट पर आदित्य प्रकाश एंसेंबल ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने लाॅर्ड ऑफ द केव, गंगा, माया महाठगिनी और नैना ठग लेंगे... के साथ ही हम परदेशी... की प्रस्तुति दी। इसके बाद अगम की प्रस्तुति ने समकालीन सुरों और आध्यात्मिक ऊर्जा के संगम के साथ उत्सव को अगले साल तक विराम दिया।
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