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महेश श्रीवास्तव को काम का मिला इनाम, बनाए गए काशी क्षेत्र के भाजपा अध्यक्ष

Mon, 14 May 2018 03:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पीएम मोदी से मुलाकात करते महेश चन्द्र श्रीवास्तव - फोटो : file photo
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प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेन्द्र नाथ पांडेय ने महेश चन्द्र श्रीवास्तव को काशी क्षेत्र का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। महेश चंद्र श्रीवास्तव बाल्यकाल से आरएसएस के स्वयंसेवक रहे हैं। वर्षों से अनेक सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से समाज सेवा का कार्य करने के साथ ही वह पार्टी में भी सक्रिय रहे।
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श्रीवास्तव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रबंधन के चलते उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। 2013 में काशी क्षेत्र की टीम में उन्हें क्षेत्रीय मंत्री का दायित्व दिया गया था।

क्षेत्रीय मंत्री के रूप में पीएम नरेंद्र मोदी की विजय शंखनाद रैली के कोऑर्डिनेटर के रूप में उन्होंने सफल आयोजन किया। इसी दौरान 2014 लोकसभा चुनाव में आर्थिक प्रबंधन का भी काम किया।
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इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय मंत्री रहते हुए प्रभारी के रूप में विशाल बूथ अध्यक्ष सम्मेलन, जौनपुर व इलाहाबाद लोकसभा चुनाव का कार्य किया। क्षेत्रीय मंत्री के रूप में बेहद सफल कार्यकाल के बाद इनाम के रूप में उन्हें केशव प्रसाद मौर्य की टीम में प्रदेश मंत्री का दायित्व दिया गया था।

इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने और 2017 विधानसभा के चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष कार्य किया। इसी दौरान अमित शाह की विशाल परिवर्तन यात्रा का आयोजन सोनभद्र में प्रभारी के रूप में किया। 
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कायस्थ समीकरणों का संतुलन 

महेश चन्द्र श्रीवास्तव - फोटो : file photo
इसके अलावा महेश श्रीवास्तव अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री, भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संयोजक व प्रांतीय अध्यक्ष, वरुणा देव दीपावली महोत्सव के संस्थापक अध्यक्ष, रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा के उपाध्यक्ष, गंगा समग्र के संयोजक और रानी लक्ष्मीबाई जन्मोत्सव समिति के संयोजकी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

जानकारों की मानें तो फूलपुर संसदीय सीट के उपचुनाव में पार्टी को सलाह दी गई थी कि यहां से कायस्थ उम्मीदवार मैदान में उतारा जाए। पार्टी ने उस समय इसे नजरअंदाज कर दिया। चुनाव हारने के बाद एक बार फिर यह बात चर्चा में आई और कहा गया कि कायस्थ समाज को महत्व दिया जाए।

गोरखपुर में निषाद समुदाय की एकता और चुनाव नतीजे को ध्यान में रखते हुए भी यह फैसला लिया गया है। माना जा रहा है कि इससे पार्टी को पूर्वांचल में जातीय समीकरण दुरुस्त करने में मदद मिलेगी।  
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