राजनीति के नए केंद्र बिंदु पूर्वांचल में भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के सामने कई चुनौतियां हैं। निकाय चुनाव इसमें सबसे अहम हैं। इस चुनाव के नतीजे आने वाले लोकसभा चुनाव की नींव रखेंगे।
2012 में प्रदेश के 13 नगर निगमों में से 12 पर निकाय चुनाव हुआ था। इनमें से 11 स्थानों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। परिसीमन नहीं होने के कारण सहारनपुर में चुनाव नहीं हो सका था।
बरेली को छोड़कर मुरादाबाद, झांसी, अलीगढ़, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा, बनारस और लखनऊ में भाजपा के मेयर हैं। इसके अलावा कोऑपरेटिव सोसाइटी के भी चुनाव होने हैं। सहकारिता में समाजवादी पार्टी ने गहरे तक जड़े जमा रखी हैं। ऐसे में दोनों ही चुनाव जीतने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी डॉ. पांडेय की होगी।
पूर्वांचल की नब्ज समझने वाले डॉ. पांडेय छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। संगठन ने जो भी जिम्मेदारी दी, उसे निभाया। काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में 15 जिलों के 75 विधानसभाओं के बारे में भी वह बखूबी जानते हैं। पूर्वांचल के 23 लोकसभा और 126 विधानसभा सीटों के बारे में भी उनके अनुभव हैं।
भाजपा में अब तक पूर्वांचल में ब्राह्मणों के नेता के रूप में कलराज मिश्र, केशरी नाथ त्रिपाठी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी को ही जाना जाता था। ऊर्जावान नेताओं को आगे करने की नीयत से ही डॉ. पांडेय को प्रदेश की कमान सौंपी गई है। शुक्रवार को दिल्ली में डॉ. पांडेय से मुलाकात करने के लिए उनके संसदीय क्षेत्र चंदौली से कई लोग गए हैं।