काशी विद्यापीठ में यूजी-पीजी की कुल सीटों की संख्या लगभग 8000 है। कई विभागों में अब तक सीटों से भी काफी कम आवेदन आए हैं। एमए संस्कृत में 165 सीटें हैं। इसमें अब तक महज 13 आवेदन आए हैं। एमए अर्थशास्त्र में भी 165 सीटों के मुकाबले अब तक महज 51 आवेदन आए हैं। इसी तरह एमएसडब्ल्यू में कुल 84 सीटों के मुकाबले 67, बीलिब में 66 सीटों के मुकाबले 25 और एमए राजनीति शास्त्र में 165 सीटों के मुकाबले 118 आवेदन आए हैं। अपेक्षा के विपरीत बेहद कम संख्या में आवेदन आने से सीटें खाली रह जाने की आशंका में विश्वविद्यालय प्रशासन दूसरी बार आवेदन तिथि बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
क्या बोले अधिकारी
अभी बड़ी संख्या में बच्चे सीयूईटी के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। हमारे क्षेत्र में ऐसे बच्चों की संख्या कम है, जो एक साथ चार-चार फॉर्म भर पाएं। आवेदनों की स्थिति को देखते हुए अंतिम तिथि 30 को आगे बढ़ाने पर विचार करने के लिए 28 जून को डीन और विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई गई है। उसमें आवेदन तिथि बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा। - प्रो. एके त्यागी, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ।
जिन पाठ्यक्रमों में सीटों के दोगुने से कम आवेदन आए हैं उनमें प्रवेश परीक्षा नहीं कराई जाएगी। उनमें सीधे प्रवेश लिया जाएगा। इसलिए बीए में प्रवेश के लिए अब तक 2017 आवेदन आने के बावजूद इसे नॉन एंट्रेंस की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन, अगर अंतिम तिथि तक सीटों के दोगुने यानी 2200 से अधिक आवेदन हो गए तो इसे भी एंट्रेंस कैटेगरी में लाया जा सकता है। गौरतलब है कि मंगलवार शाम तक बीकॉम में 346 सीटों के लिए सर्वाधिक 1797 आवेदन आए थे। कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि अब तक आए आवेदनों के मद्देनजर 12 से 14 पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षा कराने की जरूरत पड़ेगी।