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काशी में मंदिरों का महासम्मेलन: लक्ष्मीकांता चावला बोलीं- भक्ति के साथ ही शक्ति का केंद्र बनें मंदिर

Sat, 22 Jul 2023 10:56 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

 श्री दुर्ग्याणा तीर्थ अमृतसर की पहली महिला अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा कि  हर कोई मंदिरों का लाभ लेना चाहता है। अभी तो हालत यह है कि शाम को मांस खाने और शराब पीने वाले सुबह मंदिरों के अधिकारी बन जाते हैं। पंजाब के मंदिरों में तो यह बुराई आ गई है। 
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श्री दुर्ग्याणा तीर्थ अमृतसर की पहली महिला अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांता चावला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मंदिरों को भक्ति के साथ शक्ति का केंद्र होना चाहिए। गरीबों को भोजन के साथ ही कपड़े और शिक्षा मिलनी चाहिए। मंदिर प्रबंधन इस मामले में संकोच कर रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर व्यवस्था बनाने के लिए प्रयासरत हैं। मंदिरों का प्रबंधन पूरी तरह से भक्तों के पास होना चाहिए। अगर भक्तों के पास प्रबंधन होगा तो परेशानियां नहीं आएंगी। यह कहना है श्री दुर्ग्याणा तीर्थ अमृतसर की पहली महिला अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांता चावला का।

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शनिवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मंदिरों के महासम्मेलन में प्रो. चावला ने कहा कि हर कोई मंदिरों का लाभ लेना चाहता है। अभी तो हालत यह है कि शाम को मांस खाने और शराब पीने वाले सुबह मंदिरों के अधिकारी बन जाते हैं। पंजाब के मंदिरों में तो यह बुराई आ गई है। मैं, उत्तर भारत में किसी मंदिर की पहली महिला अध्यक्ष हूं और इसके खिलाफ निरंतर आवाज उठा रही हूं।
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मरी-मरी से आवाज में सुनाई देती है खालिस्तान की आवाज

पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि कभी-कभी मरी-मरी आवाज में खालिस्तान की आवाज सुनाई देती है, लेकिन अब सभी कनाडा चले गए हैं। मंदिर और अर्चकों को सशक्त बनना होगा। हम केवल घंटी, आरती और प्रसाद के लिए न बनें। मंदिर का पुजारी शास्त्र के साथ ही शस्त्र संचालन में भी प्रशिक्षित होना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो जिस तरह से हमने सोमनाथ का ध्वंस और विनाश देखा वैसा फिर दोबारा नहीं होगा। कोई संकट आएगा तो उससे आसानी से उससे निपट लेंगे। मंदिर के पुजारी का महत्व और उसकी इज्जत मंदिर के प्रधान से ज्यादा होनी चाहिए।
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