पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद के सवाल पर अध्यक्ष ने कहा कि कभी-कभी मरी-मरी आवाज में खालिस्तान की आवाज सुनाई देती है, लेकिन अब सभी कनाडा चले गए हैं। मंदिर और अर्चकों को सशक्त बनना होगा। हम केवल घंटी, आरती और प्रसाद के लिए न बनें। मंदिर का पुजारी शास्त्र के साथ ही शस्त्र संचालन में भी प्रशिक्षित होना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो जिस तरह से हमने सोमनाथ का ध्वंस और विनाश देखा वैसा फिर दोबारा नहीं होगा। कोई संकट आएगा तो उससे आसानी से उससे निपट लेंगे। मंदिर के पुजारी का महत्व और उसकी इज्जत मंदिर के प्रधान से ज्यादा होनी चाहिए।