महाप्रभु वल्लभाचार्य के प्राकट्य महोत्सव पर मंगलवार को जतनबर से निकाली गई शोभायात्रा में वैष्णव जनों का तांता लग गया। इस शोभायात्रा में नंद, यशोदा के स्वरूप भी थे और गोप-गोपियां भी। स्वरूपों की झलक पाने के लिए छतों, बारजों पर लोगों की भीड़ लगी रही। बाजे गाजे के साथ निकाली गई शोभायात्रा में बच्चों, महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। करीब पांच सौ वर्ष पहले महाप्रभु ने काशी में जतनबर में ही पहली बैठक लगाई थी और यहीं से उन्होंने पुष्टिमार्ग का संदेश दिया था। उधर, गोपाल मंदिर से षष्ठपीठाधीश्वर श्याम मनोहर महाराज की अगुवाई में शोभायात्रा निकाली गई।
दोपहर बाद करीब 3:30 बजे जतनबर स्थित बैठक से बेटीजी मंदिर के पीठाधीश्वर गोस्वामी कल्याण राय ने महाप्रभु की प्रतिमा को तिलक लगाने के बाद सुसज्जित सुखपाल में विराजित कराया। इसी के साथ शोभायात्रा निकाली गई। सैकड़ों वैष्णव महाप्रभु के जयकारे लगाते हुए बढ़ रहे थे। वल्लभ विद्यापीठ बालिका इंटर कॉलेज, वल्लभ शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राओं के समूह भजन गाते चल रहे थे। राधा कृष्ण के वेश में बच्चे आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। महिलाएं सिर पर कलश लिए हुए मंगल गीत गा रही थीं। अष्टछाप की कीर्तन मंडली मृदंग, हारमोनियम के साथ अष्ट शखाओं सूरदास, नंद दास, गोविंद स्वामी, परमानंद दास के पदों को गा रही थी।
काशी अग्रवाल समाज, अग्रसेन युवा समाज, अग्रसेन सेवा संस्थान, भारत भारती परिषद, जीवन विद्या संस्थान, वल्लभ युवक परिषद, नागर वीसा समाज, पोरवाल समाज, भारत विकास परिषद के पदाधिकारी शोभायात्रा में शामिल हुए। भैरोनाथ, गोलघर, सोराकुआं, ठठेरी बाजार, भारतेंदु भवन, जौहरी बाजार होते हुए शोभायात्रा चौखंभा स्थित बेटी जी मंदिर पहुंची। इस मौके पर पं. विकास दीक्षित, पं. रमेश उपमन्यु, पं. मनीष पुरोहित, बलराम शास्त्री, शेषनारायण शास्त्री, वल्लभ शास्त्री, जन संपर्क मंत्री अशोक वल्लभ दास, बीडी गुजराती, घनश्याम दास शाह, नरोत्तम दास अढ़तिया समेत तमाम लोग उपस्थित थे। वहीं शोभायात्रा का संकल्प और अग्रसेन सेवा संस्थान की ओर से गोलघर के पास स्वागत किया गया। इस दौरान संतोष अग्रवाल कर्णघंटा, अनिल कुमार जैन, सुबोध जैन आदि रहे।