महामंडलेश्वर संजनानंद गिरि महाराज ने कहा रामलला की प्राण प्रतिष्ठा सनातन के उदय का काल है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु के रूप में देखने के लिए नारी शक्ति को भी इसमें सहयोग करना होगा।
मां कामाख्या त्रिशक्ति धाम पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की महामंडलेश्वर संजनानंद गिरि महाराज ने कहा जय हिंद में बहुत दम है। इसके उच्चारण से ही मन में राष्ट्रवाद का भाव जागृत हो जाता है। सिर्फ 26 जनवरी और 15 अगस्त पर ही जय हिंद का उद्घोष नहीं होना चाहिए। इसे स्कूलों के साथ हर जगह अनिवार्य कर देना चाहिए। जब हम जय हिंद बोलते हैं तो अपने राष्ट्र को नमन करते हैं।
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मां कामाख्या के अनुष्ठान के लिए काशी भ्रमण पर कामाख्या से काशी पहुंचीं महामंडलेश्वर ने कहा कि हम भारत को विश्व गुरु के रूप में देखने की कल्पना कर रहे हैं। इसके लिए भारत की नारी शक्ति को भी इसमें सहयोग करना होगा। पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण को छोड़कर अपनी गौरवशाली संस्कृति का अनुकरण करना होगा। मां सीता, अहिल्या, सावित्री, अपाला और रानी लक्ष्मीबाई के पदचिह्नों पर चलना होगा। बिना स्त्री शक्ति के विश्वगुरु की कल्पना पूर्ण नहीं होगी। पहली बार काशी आकर असीम ऊर्जा का अहसास हुआ है।
मां कामाख्या के धाम से बाबा विश्वनाथ की नगरी में आकर जो अनुभव हुआ है उसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के सवाल पर संजनानंद गिरि ने कहा कि भगवान राम का अस्तित्व तो अनादि काल से है और हमेशा रहेगा। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का अवसर सनातन धर्म के उदय का काल है। नौ साल की उम्र में संन्यास लेने वाली महामंडलेश्वर संजनानंद ने बताया कि मां कामाख्या की प्रेरणा से उन्होंने यह मार्ग चुना।