महामना कैंसर संस्थान में इंतजार करते मरीज
- फोटो : अमर उजाला
रामेश्वर के इस कदम से परिजन भी हैरान, कारण का पता नहीं
घटना से परिजन भी हैरान हैं। उन्हें भी कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। छोटे भाई कमलेश ने बताया कि रामेश्वर के दो बेटे और एक बेटी है। बीमारी को लेकर भैया चिंतित थे लेकिन ऑपरेशन होने के बाद सामान्य हो गए थे। कमलेश ने बताया कि भइया को नींद आने के बाद नीचे आकर बैठ गया था। कहीं घर में भी किसी को उन्होंने कुछ नहीं बताया।
इसे भी पढ़ें; Cough Syrup Case: शुभम की गिरफ्तारी पर दुबई सरकार ने जताई सहमति, 39 हजार पन्नों की चार्टशीट के बाद शिकंजा
अस्पताल में किसी ने पूछा नहीं, बस मांगते रहे आधार कार्ड नंबर
शिवपुर पोस्टमार्टम हाउस पर कमलेश ने बताया कि घटना की जानकारी होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन से किसी ने कुछ नहीं पूछा। यह भी नहीं बताया कि आखिर वार्ड के बेड से उठकर खिड़की तक जाकर कूदते समय यहां सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं था। घटना के बाद बस लोग हमसे मेरा नाम, घर का पता और आधार कार्ड नंबर ही मांगते रहे। वार्ड में मुस्तैदी से डयूटी करने की जगह सुरक्षाकर्मी सो रहा था।
महामना मदन मोहन कैंसर संस्थान
- फोटो : अमर उजाला
अस्पताल प्रशासन नहीं बता सका मरीज का नाम, इलाज की जानकारी
कैंसर संस्थान में जान देने वाले मरीज का नाम, इलाज का विवरण अस्पताल प्रशासन नहीं दे सका। पहले तो बहुत देर तक घटना के बारे में ही जानकारी देने से अस्पताल प्रशासन बचता रहा। मंगलवार सुबह 11 बजे एक बयान जारी किया गया। बताया गया कि सोमवार देर रात 35 साल के पुरुष मरीज की आत्महत्या की घटना सामने आई है। मरीज की पैनक्रियाटिक कैंसर की सर्जरी हुई थी। उपचार के बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति संतोषजनक थी। अस्पताल प्रशासन ने घटना को दुखद बताते हुए शोक भी जताया है। चौकाने वाली बात यह है कि जब मरीज 15 दिन से भर्ती था। छत से कूदकर जान दे दी, फिर भी अस्पताल प्रशासन को मरीज का नाम, पता नहीं पता है।
अधिकारी बोले
अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर चितईपुर थाना प्रभारी राकेश गौतम घटनास्थल पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने भी छानबीन की। रामेश्वर कुमार के शव को चितईपुर पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। किसी तरह की तहरीर थाने पर नहीं दी गई। -गौरव कुमार, एसीपी भेलूपुर