बाबा के सिर सजेगी राजशाही पगड़ी
रंगभरी एकादशी के बारे में पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी का कहना है कि पहले से चली आ रही परंपरा के तहत ही सारे आयोजन होंगे। इसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहली बार महंत आवास के बाहर से होने वाले इस आयोजन में पुरानी प्रतिमा ही जाएगी। इस दौरान बाबा के सिर नीले रंग की राजशाही पगड़ी सजेगी। तन पर गुजराती खादी का कुर्ता-धोती भी रहेगा। इसके अलावा गौरा भी लाल बनारसी जरीदार साड़ी में दिखेंगी। गौने में ढोल-नगाड़े, डमरू बजाते हर हर महादेव के जयघोष के साथ लोग अबीर गुलाल उड़ाकर बाबा संग होली खेलेंगे।
शिवांजलि में होली गीत, नृत्य नाटिका की प्रस्तुति
रंगभरी एकादशी के दिन पांच मार्च को मध्याह्न भोग आरती के बाद टेढ़ीनीम स्थित नवीन मंहत आवास पर सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘शिवांजली’ का आयोजन भी होगा। इसमें काशी के अलावा प्रदेश के कई जिलों से आए कलाकारों की ओर से होली गीत और नृत्य नाटिका की प्रस्तुति की जाएगी। दिल्ली, सुल्तानपुर, जौनपुर, मथुरा और अवध के कलाकारों में कुछ टीमें देर शाम तक काशी पहुंच गई हैं। इस दौरान भभूत की होली भी खेली जाएगी।