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महाशिवरात्रि 2026: असमिया वैभव में सजेंगे शिव-गौरा, भक्त होंगे बराती; रस्मों को लेकर भक्तिमय हुआ माहौल

Sun, 08 Feb 2026 04:38 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: महाशिवरात्रि पर शिव-गौरा असमिया वैभव में सजेंगे। बाबा विश्वनाथ चेलेंग-गसोमा धारण करेंगे। वहीं माता गौरा रेशमी मखेला साड़ी से अलंकृत होंगी। 
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Kashi Vishwanath Dham - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर शिव–गौरा पहली बार असमिया वैभव में दिखेंगे। बाबा विश्वनाथ धारण करेंगे ‘चेलेंग–गसोमा’, तो माता गौरा रेशमी मेखेला साड़ी और जूनबीरी आभूषणों से अलंकृत होंगी। भक्त बराती बनकर उत्सव का हिस्सा बनेंगे।

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महाशिवरात्रि में एक सप्ताह बचा है। शिव-विवाह की सदियों पुरानी परंपराओं को लेकर तैयारियां चरम पर हैं। टेढ़ीनीम स्थित विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ की हल्दी, शिव-विवाह, शिव बारात और गौना की रस्मों को लेकर माहौल भक्तिमय हो उठा है। महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का शृंगार आकर्षण का केंद्र होगा। पहली बार शिव–गौरा की चल प्रतिमा असमिया पारंपरिक परिधान और आभूषणों में सजेगी। 

पूर्व महंत के पुत्र वाचस्पति तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के परिधान असम के शिवसागर से मंगाए गए हैं। यह शृंगार न केवल परिधान की दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी महत्वपूर्ण है। इससे काशी और असम की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।
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बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को असमिया पुरुष परिधान ‘चेलेंग और गसोमा’ से सजाया जाएगा। यह परिधान वहां की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इस परिधान में बाबा राजसी और दिव्य दिखाई देंगे। वहीं, माता गौरा को लाल और सुनहरे रंग की रेशमी ‘मेखेला साड़ी’ पहनाई जाएगी, जो असम की पारंपरिक स्त्री पोशाक है। असमिया जूनबीरी (अर्धचंद्राकार हार), गुमखारू (पारंपरिक कंगन) और थुरिया (मांगटिका) से भी शृंगार होगा। इन आभूषणों के साथ माता गौरा का स्वरूप एक नववधू के रूप में अलौकिक दिखाई देगा।

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आकांक्षा दे रही हैं आकर्षक स्वरूप

महंत आवास पर ही काशी की सांस्कृतिक कलाकार आकांक्षा गुप्ता के नेतृत्व में कलाकार लोक कल्याण और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ माता गौरा का आकर्षक स्वरूप दे रहे हैं। कलाकारों के प्रयास से शृंगार परंपरा और भक्ति का अनूठा संगम होगा।

मलमल और जरी से तैयार कर रहे राजसी परिधान
महंत आवास की आयोजन समिति के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर निकलने वाली ऐतिहासिक शिव बारात में भी एक नया आकर्षण जोड़ा गया है। काशीवासियों की ओर से शिव बारात में शामिल प्रतीकात्मक बाबा विश्वनाथ की प्रतिमा को काशी में ही बने मलमल और जरी से तैयार राजसी परिधान धारण कराए जाएंगे। यह पोशाक भी काशी की कलाकार आकांक्षा गुप्ता द्वारा तैयार की जा रही है। काशी की पारंपरिक बुनाई और कारीगरी को शिव बारात के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
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