बाबा लाट भैरव की उतारी गई महा आरती।
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विविध प्रकार के व्यंजनों का लगा भोग
सायंकाल भव्य अन्नकूट श्रृंगार कर झांकी सजायी गयीं। बाबा के चहुंओर मधुर स्वाद से सराबोर विविध प्रकार के व्यंजनों जैसे लड्डू, बर्फी, फल, नमकीन, मेवे आदि को पंक्तिबद्ध कर सजाया गया था।पूरे मंदिर प्रांगण को पंडाल का भव्य स्वरूप दिया गया था। मंदिर के चबूतरे पर संगीतमय सुंदरकांड का पाठ चल रहा था।
वहीं समीप के रामबाग में नगर वधुओं ने बाबा के चरणों में हाजिरी लगाई।हर हर महादेव के गगनभेरी उद्घोष से सम्पूर्ण मंदिर परिक्षेत्र गूंजता रहा।भंडारे में बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।देर रात्रि पाक्षिक अष्टमी पूजन संपन्न हुआ। महाभैरवाष्टमी पर महाआरती का आयोजन किया गया।
पुजारी संजय पांडेय ने धूप, दीप, कपूर, लोहबान, पुष्प, वस्त्र, चँवर, जल आदि से आरती उतारी।आयोजन में प्रमुख रूप से समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल (पार्षद), प्रधानमंत्री छोटेलाल जायसवाल, उपाध्यक्ष बसंत सिंह राठौर, मंत्री मुन्ना लाल यादव, विक्रम सिंह राठौर, छोट्टन केशरी, नंदलाल प्रजापति, बच्चे लाल, कर्णशंकर पांडेय, शिवम अग्रहरि, सुशील जायसवाल, अंकित, निक्की, घनश्याम, मंदीप सोनकर, नवीन, आलोक, हिमांशु, रितेश आदि रहें।
काशी में विराजमान अष्टभैरव
काशी में अष्टभैरव विराजमान हैं। इसमें दुर्गाकुंड पर चंड भैरव, हनुमानघाट पर रुद्रभैरव, कमच्छा पर क्रोधन भैरव व उन्मत्त भैरव, नखास पर भीषण भैरव, दारानगर में असितांग भैरव, सरैयां में लाट भैरव, गायघाट पर संहार भैरव विराजमान हैं। श्री कालभैरव को काशी का कोतवाला माना जाता है।
श्रीकृष्ण ने छलिया वेश धर भक्तों को किया निहाल
राधाकृपा परिवार की ओर से दुर्गाकुंड स्थित श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में चल रहे श्रीकृष्णलीला महोत्सव के दूसरे दिन वृंदावन से आए कलाकारों ने मुंदरी चोरी लीला की मनभावन प्रस्तुति देख भक्त विभोर हो गए। राष्ट्रपति पदक से पुरस्कृत रासाचार्य स्वामी फतेहकृष्ण शर्मा (रसराज) के निर्देशन में मुंदरी चोरी लीला हुई।
श्रीकृष्ण की लीलाओं से ब्रज का कण-कण रससिक्त है। श्रीकृष्ण ने ब्रज रासेश्वरी श्री राधारानी को नृत्य सिखाते हुए उनकी मुद्रिका (अंगूठी) चुरा ली। जब सखियों को पता चला कि मुंदरी कोई और नहीं श्रीकृष्ण ने ही चुराई है तो सखियों के आग्रह पर राधारानी ने श्रीकृष्ण के शृंगार के आभूषण चोरी कर लिए।
इसके बाद प्रभु ने विरहणी सखी का वेश धारण किया तो राधारानी ने प्रभु के आभूषणों से स्वयं श्रीकृष्ण का शृंगार कर ठाकुरजी को दर्शन दिए। युगल सरकार की इस अद्भुत छवि के दर्शन कर भक्त धन्य हुए। स्वामी रसराज ने कहा कि श्री राधारानी के लिए वर्णन आता हैं कि चौंसठ कला प्रवीण तदपि अति भोरी। यानी श्री राधारानी स्वयं 64 कलाओं में पारंगत हैं।