गैंगस्टर एक्ट का यह मामला 1991 में वाराणसी में अवधेश राय हत्याकांड के बाद मुख्तार अंसारी और उसके सहयोगी भीम सिंह पर गाजीपुर की सदर कोतवाली में 1996 में दर्ज हुआ था। तब मुख्तार अंसारी पर 1991 में अवधेश राय हत्याकांड, गाजीपुर कोतवाली क्षेत्र में तत्कालीन एडिशनल एसपी पर गोली चलाने के अलावा कुछ अन्य मामलों को लेकर कुल पांच चार्ज लगे थे।
इन पांच में दो वाराणसी, दो गाजीपुर और एक चंदौली में हुए केस थे। 1996 में ये केस दर्ज हुए थे। 26 साल के बाद गुरुवार को कोर्ट ने मुख्तार अंसारी और उसके सहयोगी भीम सिंह को दोषी करार देते हुए 10 साल जेल की सजा सुनाई है। साथ ही पांच लाख का जुर्माना भी लगाया है।
तीन अगस्त 1991 को अवधेश राय लहुराबीर स्थित अपने घर के दरवाजे पर थे, उसी समय अंधाधुंध फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी गई थी। पूरा शरीर गोलियों से छलनी कर दिया गया था। छोटे भाई, पूर्व विधायक अजय राय ने चेतगंज थाने में मुख्तार अंसारी, पूर्व विधायक अब्दुल कलाम, भीम सिंह, कमलेश सिंह और राकेश न्यायिक समेत अन्य के खिलाफ हत्या समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था। 31 साल पुराना यह मामला अदालत में अभी विचाराधीन है।
इसी मामले में मुख्तार और उसके सहयोगी भीम सिंह अन्य पर शिकंजा कसते हुए गाजीपुर की सदर कोतवाली में 1996 में गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। मुख्तार अंसारी पर अवधेश राय हत्याकांड, गाजीपुर कोतवाली क्षेत्र में तत्कालीन एडिशनल एसपी पर फायरिंग के अलावा कुछ अन्य मामलों को लेकर पांच मुकदमे दर्ज थे। इन पांच में दो वाराणसी, दो गाजीपुर और एक चंदौली में मुकदमे दर्ज थे। 26 साल के बाद कोर्ट ने मुख्तार अंसारी और उसके सहयोगी भीम सिंह को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच लाख का जुर्माना भी लगाया है।