इसी क्रम में वाराणसी में अवधेश राय की हत्या के मामले में उनके भाई अजय राय की भी गवाही हुई। विचारण के दौरान 11 गवाह पेश किए गए। पिछले माह अपर सत्र न्यायाधीश एमपी- एमएलए कोर्ट रामसुध सिंह की अदालत में 25 नवंबर को फैसले की तिथि तय हुई थी, लेकिन उनका स्थानांतरण हो गया और मामला चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट दुर्गेश की अदालत में विचारण के लिए भेजा गया।
न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गईं। फिर 12 दिसंबर को गवाहों ने बयान दिए। जिरह और बहस पूरी होने के बाद फैसले के लिए बृहस्पतिवार की तिथि तय की गई थी। जिसमें गैंगस्टर एक्ट के तहत दोनों अभियुक्तों को सजा हुई।
मुख्तार अंसारी पर गैंगस्टर के पांच आरोप हैं। इनमें वाराणसी के कैंट थाने में राजेंद्र सिंह हत्याकांड का केस, गाजीपुर थाना कोतवाली में वशिष्ठ तिवारी उर्फ माला गुरु हत्याकांड में मुकदमा, वाराणसी के चेतगंज थाना में अवधेश राय हत्याकांड में मुकदमा, चंदौली के मुगलसराय थाने में कांस्टेबल रघुवंश सिंह हत्याकांड में केस दर्ज है।
गाड़ी चेकिंग करते समय पुलिस बल पर जानलेवा हमले में रघुवंश सिंह की मृत्यु हो गई थी। गाजीपुर में एडिशनल एसपी और अन्य पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला थाना कोतवाली गाजीपुर में दर्ज है।
तीन अगस्त 1991 को दिन में करीब एक बजे अजय राय अपने भाई अवधेश राय के साथ वाराणसी स्थित मकान के गेट पर खड़े थे। इतने में एक सफेद रंग की मारुति वैन आई। जिसमें मुख्तार अंसारी सहित कुछ लोग मौजूद थे। वह गाड़ी से उतरे और ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे, जिसमें अवधेश राय को गोली लग गई और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इसी मामले में मुख्तार अंसारी और भीम सिंह के विरुद्ध थाना कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
अवधेश राय के भाई व पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि गाजीपुर न्यायालय ने दुर्दांत अपराधी मुख्तार अंसारी और भीम सिंह को गैंगस्टर एक्ट में सजा सुनाई गई है। इसके लिए मैं न्यायपालिका को धन्यवाद देता हूं। निश्चित तौर पर यह काफी पुराना मामला है। मेरे भाई की हत्या के बाद मुख्तार पर गैंगस्टर लगा। पूर्व की सरकारों की उदासीनता के कारण मामला काफी लंबा चला, लेकिन आज सजा हुई है। इसके लिए फिर से मैं न्यायपालिका को धन्यवाद देता हूं।