चैत्र शुक्ल पूर्णिमा शनिवार को काशी, प्रयाग समेत देश के प्रमुख महानगरों में चंद्र ग्रहण खंडग्रास के रूप में दिखेगा। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत देश के अन्य इलाकों में चंद्रमा का उदय ग्रहण काल में ही होगा। काशी में लोग चंद्रगहण का न तो स्पर्श देख सकेंगे न ही मध्य। शाम 6:13 बजे यहां ग्रहण काल में दिखने वाले चांद का मोक्ष शाम 7:15 बजे होगा। चंद्रग्रहण शाम पौने चार बजे ही लग जाएगा।
सूतक लगने की वजह से ग्रहण दर्शन के नौ घंटे पहले ही सुबह 9:13 बजे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। गर्भगृह के बाहर भक्त भजन-कीर्तन और ध्यान कर सकते हैं। काशी में ग्रहण की अवधि एक घंटा दो मिनट होगी। पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के स्नान के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु काशी पहुंचेंगे।
इसे देखते हुए गंगा घाटों पर भी तैयारियां की गई हैं। ग्रहण स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने का अनुमान है। द्वारका-शारदा, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य काशी में ही ग्रहण स्नान करेंगे। महावीर पंचांग के संपादक रामेश्वर नाथ ओझा के मुताबिक यह चंद्र ग्रहण हस्ति नक्षत्र, कन्या राशि में लगेगा। ऐसे में वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, मकर, कुंभ और मीन राशि के लोगों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
ज्योतिषियों ने इन राशियों के जातकों को ग्रहण देखने से परहेज करने की सलाह दी है। ग्रहण के बाद शाम 7:15 बजे मोक्ष के बाद मंदिरों की धुलाई-सफाई होगी। इसके बाद धूमधाम से हनुमान जयंती मनेगी। चंद्र ग्रहण के मद्देनजर हनुमान जयंती की झांकियां सुबह नौ बजे के पहले ही निकल जाएंगी।