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महाभारतकालीन चंद्र ग्रहण: वाराणसी में शाम 6.48 बजे तक दिखा ग्रहण, इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव

Tue, 03 Mar 2026 02:23 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Chandragrahan: मंगलवार को शाम छह बजे से 6.48 बजे तक चलने वाला चंद्र ग्रहण अग्नि पंचक योग पर लगने से महाभारत कालीन माना जा रहा है। 19 साल बाद होली से पहले ग्रहण लगा है। विस्तार से पढ़ें पूरी खबर-
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कुछ घंटों में लगने वाला है चंद्र ग्रहण, भारत में कब दिखेगा ब्लड मून? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंद्र ग्रहण मंगलवार को शाम छह बजे से लगा और 6.48 बजे तक दिखा। यह ग्रहण महाभारत कालीन है। क्योंकि इस दिन अग्नि पंचक योग पर लगा। महाभारत काल के समय भी फाल्गुन माह में ग्रहण दो बार लगा था। यही नहीं 19 साल बाद होली के एक दिन पहले ग्रहण लगा है। पिछले माह ही फाल्गुन माह कृष्णपक्ष अमावस्या यानी 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लगा था।

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इस बार काशी के साथ ही देशभर में होली मनाई जाएगी। होली के दो दिन पहले होलिका दहन हुआ और एक दिन पहले चंद्र ग्रहण लगा। यह ग्रहण भारत में शाम छह बजे से 6:48 बजे तक रहा। नौ घंटे पहले सूतक काल लगने से शहर के सभी मंदिरों के पट बंद हो गए। 

ज्योतिषविदों का मानना है कि द्वापर युग के अंत में महाभारत का युद्ध हुआ था, तब इसी तरह का ग्रहण लगा था। तभी फाल्गुन मास की पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण और इस मास के कृष्णपक्ष अमावस्या तिथि को सूर्य ग्रहण लगा था। पिछले माह 17 फरवरी को अमावस्या तिथि को ही सूर्य ग्रहण लगा था। हालांकि भारत में दृश्यमान नहीं था।

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आचार्यों ने दी जानकारी

आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि महाभारत काल में लगा चंद्र ग्रहण भी अग्नि पंचक योग पर लगा था। इस बार भी यही योग लगा। इसमें खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अग्निपंचक ग्रहण कहा गया। इसमें ग्रहण लाल भी दिखाई दिया, जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है। इसे अमंगलकारी माना जाता है। इसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ेगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि ग्रहण सिंह राशि में लगेगा। 

इस राशि वालों को लोगों के लिए जपदान और हवन फलदायी होता है। बीएचयू ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय ने कहा कि मंदिरों में सूतक काल के दौरान विग्रहों को स्पर्श नहीं करने का विधान है। अपने घर में भी देवी-देवताओं को स्पर्श नहीं किया जा सकता है। जिस काल खंड में ग्रहण दिखाई देगा, उसका शुभ-अशुभ या विशेष प्रभाव उन्हीं क्षेत्रों पर होगा।
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जानें कब खुलेंगे मंदिर
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और बाबा कालभैरव मंदिर शाम 4:30 बजे बंद हुआ और शाम 7:15 बजे खुलेगा। भारत में ग्रहण काल शाम 5:59 से 6:47 बजे तक है। ग्रहण समय से डेढ़ घंटे पहले मंदिर बंद हो गए। 51 शक्तिपीठों में एक विशालाक्षी मंदिर दोपहर 3:30 बजे बंद हुआ। जबकि माता अन्नपूर्णा, संकठा, कालरात्रि मंदिर दोपहर दो बजे बंद हुए। सूतक काल में मंदिरों में आरती, पूजा और दर्शन बंद रहे।

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