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लोटा-भंटा मेले में कोरोना का असर, सैकड़ों में सिमटी भीड़

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पंचक्रोशी मार्ग के तीसरे पड़ाव रामेश्वर में अगहन छठ पर लगने वाले लोटा-भंटा मेले में कोरोना का असर दिखा। हजारों में जुटने वाली भीड़ महज सैकड़ों में सिमट गई। करीब दो किलोमीटर लगने वाले मेले में सन्नाटा जैसा माहौल रहा। हालांकि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने वरुणा में स्नान कर रामेश्वर महादेव का दर्शन-पूजन का आशीर्वाद मांगा। इसके बाद बाटी-चोखा और खीर का प्रसाद चढ़ाया। रोहनिया विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने भी रामेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन किए।
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मेले में सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। हालांकि पहले जैसी न भीड़ रही और न ही दुकानें लगीं। सुबह 5 बजे से वरुणा में स्नान कर श्रद्धालु मंदिर में दर्शन-पूजन करते रहे। इसके बाद बगीचों और धर्मशालाओं में अहरा लगाकर बाटी चोखा लगाकर रामेश्वर महादेव को प्रसाद चढ़ाया। मंदिर के पुजारी अन्नू तिवारी के अनुसार इस वर्ष कोरोना के चलते भीड़ नहीं हुई। एसडीएम राजातालाब मणिकंडन ए ,तहसीलदार नीलम उपाध्याय, सीओ सदर राजेश मिश्रा, सीओ बड़ागांव नितेश प्रताप सिंह, एसओ जंसा सतीश सिंह, प्रशिक्षु/थानाध्यक्ष बड़ागांव सागर जैन समेत अन्य अधिकारियों ने मेले का निरीक्षण किया। ग्राम पंचायत रामेश्वर समेत सामाजिक संगठनों के युवा सहयोग में जुटे रहे।
भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने यहां एक मुट्ठी रेत से शिवलिंग की स्थापना की थी। शिव व राम का पहला मिलन स्थल जिसे रामेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। जिस पर सिंधिया नरेश ने विशाल घाट व मंदिर का निर्माण कराया। रावण वध के बाद भगवान श्रीराम को ब्रह्महत्या का पाप लग गया। जिसका प्रायश्चित करने के लिए श्रीराम ने अन्न का त्याग कर दिया। इसके बाद श्रीराम काशी आए और यहां एक मुट्ठी रेत का शिवलिंग बनाकर पूजा कर बाटी-चोखा प्रसाद बनाकर भगवान शिव को भोग लगाया और वही प्रसाद को खाकर अन्न त्याग के प्रायश्चित को समाप्त करते हुए व्रत तोड़ा।
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