गंगा की मध्यधारा पर सजे क्षीर सागर में भगवान विष्णु की नयनाभिराम झांकी विराजने के साथ प्रह्लाद घाट पर शनिवार की रात नृसिंह लीला का जीवंत मंचन आरंभ हुआ। पांच दिवसीय नृसिंह लीला देखने के लिए सैकड़ों लोग घाट की सीढ़ियों पर देर रात तक बैठे रहे। नौ मई को हिरण्याकश्यप के वध के साथ लीला का समापन होगा।
रात करीब 11 बजे शुरू हुई लीला के दृश्य में भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करते नजर आते हैं। ऋषि-मुनि उनके पास जा कर धरती को राक्षसों के अत्याचार से मुक्त कराने की प्रार्थना करते हैं। गंगा की लहरों के बीच नाव पर क्षीर सागर की झांकी सजाई गई थी। भगवान के द्वार पाल जय, विजय शाप के कारण राक्षस कुल में हिरण्य कश्यप और हिरणाक्ष्य के रूप में जन्म ले कर अत्याचार शुरू कर देते हैं।
शनिवार की लीला में पांच बाल ऋषियों का समूह भगवान विष्णु से मिलने उनके दरबार पहुंचता है। भगवान के द्वारपाल जय और विजय ऋषियों को अंदर जाने से रोक देते हैं। इससे क्रोधित होकर ऋषि- मुनियों ने जय और विजय को शाप दे दिया कि तुम दोनों राक्षस योनि में जन्म लोगे। लीला प्रेमी मंचन के दौरान हर हर महादेव के जयकारे लगा रहे थे। लीला समिति के अध्यक्ष नारायण मिश्र ने बताया कि नृसिंह लीला वर्षों से प्रह्लाद घाट पर होती आ रही है। लीला में स्थानीय कलाकारों के द्वारा भगवान विष्णु, लक्ष्मी, नरसिंह भगवान के अलावा ऋषियों के पात्रों की भूमिका की जाती है। पहले दिन जय- विजय को शाप दिए की लीला का मंचन हुआ।