वह तो नहीं गए लेकिन उनके मना करने पर भी भगवती गईं। जब वह मायके पहुंची तो बहनें मिलीं लेकिन उन्होंने भी ज्यादा बात नहीं की। मां मिली लेकिन उसने भी केवल व्यवहार निभाया। यज्ञशाला में गईं चारों ओर से देखा भगवान शिव के लिए आसन उसमें बनाया नहीं गया था। उनके मन में क्षोभ हुआ। कथा के अंत में व्यासपीठ की आरती मुख्य यजमान विकास पांडेय, रीना देवी, विपिन सिंह और डमरू बाबा ने उतारी।
इससे पूर्व सत्र में लाल बाबा के सानिध्य में श्रीरुद्र महायज्ञ के निमित्त हवन कुंड में वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां दीं। शिव शक्ति काव्य संध्या में डॉ. नागेश शांडिल्य के संचालन में चंदौली के रोहित पांडेय और कृष्णा मिश्रा, काशी की सुषमा मिश्रा और झरना मुखर्जी ने काव्यपाठ किया।
शिव शक्ति भजन संध्या का संयोजन अलख निरंजन ने किया। शिवांगी सिंह, श्रियांशी पांडेय, प्रियम पाठक, बलिराम और सरस्वती ने भजन प्रस्तुत किए। यज्ञ के प्रबंधक विपिन सिंह ने कहा कि सनातनी शक्ति को जागृत करने में आध्यात्म के साथ ही योग, संगीत और साहित्य का भी बहुत महत्व है।
रामकथा से ही हम पा सकते हैं सुख एवं चैन
पातालपुरी पीठाधीश्वर बालक देवाचार्य ने कहा कि रामकथा के माध्यम से ही हम सुख और चैन की प्राप्ति कर सकते हैं। महाराज दशरथ ने कैकेई को समझाया कि यदि तुम चाहती हो कि भरत राजा हो जाए, तो तुम्हारा यह वचन मान सकता हूं, लेकिन राम को वनवास मत मांगो पर कैकई नहीं मानी। वह शनिवार को अखिल भारतीय सनातन न्यास की ओर मां बागेश्वरी देव मंदिर जैतपुरा में आयोजित रामकथा में प्रवचन कर रहे थे।
प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया। इस दौरान आयुषमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, पूर्व महापौर मृदुला जायसवाल, अरविंद वर्मा, जय शंकर गुप्ता, जगनारायण गुप्ता, भैया लाल, विष्णु गुप्ता, असीम जायसवाल, किशोर सेठ ने व्यास पीठ की आरती उतारी।