भगवान राम का सीता से ही विवाह होना था। इसलिए उनको ही धनुष तोड़ना था क्योंकि अगर भगवान राम के साथ सीता का विवाह नहीं होता तो फिर माता का हरण नहीं होता। माता सीता का हरण नहीं होता तो रावण का वध कैसे होता? भगवान राम का जन्म तो अत्याचारी रावण का वध करने के लिए ही हुआ था।
ये बातें मैहर से पधारे जगदगुरु स्वामी रामललाचार्य ने कहीं। वह सोमवार को मारवाड़ी सेवा संघ में श्री मानसपीठ मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट एवं श्री मानसपीठ तीर्थ उत्सव सेवा समिति की ओर से आयोजित सप्त दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव में पांचवें दिन भगवान राम एवं सीता विवाह कथा का वर्णन कर रहे थे। भगवान राम एवं माता सीता की विवाह कथा में मिथिला नगरिया निहाल भइले बा चारों दूल्हा में बड़का कमाल... के भजनों की प्रस्तुति पर महिलाएं विभोर होकर नृत्य कर रही थीं। इस अवसर पर रामस्वरूप पाठक, पुरुषोत्तम शर्मा, नंदकिशोर बाबू, रामयश मिश्र, राजकुमारी शुक्ला, पुष्पा शुक्ल उपस्थित रहीं।