शिव के चरित्र का लीला माधुर्य जिसकी संज्ञा पौराणिक संस्कृति में ही देखने को मिलती है। शिव केवल वर्णों में नहीं, सूक्तों में नहीं, ऋचाओं में नहीं, वेदना की पुकार में समाहित हैं। भक्ति का निनाद जहां डमरू से बोला तो भक्तों का मन फिर कभी नहीं डोला, क्योंकि यही है भोला, जिसके हाथ में है भाला और जटा मुंड माला। ये बातें वेदांताचार्य महाराज ने सोमवार को कहीं। वह शिवपुर फलाहारी बाबा आश्रम की ओर से रामलीला मैदान में चल रहे महालक्ष्मी महायज्ञ के अवसर पर आयोजित शिवमहापुराण की कथा के चौथे दिन प्रवचन दे रहे थे। इस दौरान महंत राम दास त्यागी महाराज, राम करण दास, विनोद दुबे, कमलेश केशरी, आनंद अग्रवाल, जितेंद्र तिवारी, रोहित शुक्ला आदि मौजूद रहे।