गुरु वशिष्ठ चारों भाईयों का नामकरण करते हैं। गुरु वशिष्ठ राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघभन का यज्ञोपवीत कराते हैं। चारों भाई गुरु से विद्या अध्ययन के लिए जाते हैं और अल्प समय में ही विद्या प्राप्त कर लेते हैं। पिता की आज्ञा लेकर श्रीराम अपने मित्रों के साथ शिकार के लिए जाते हैं और मृग का शिकार करके ले आते हैं। पिता को दिखाकर कहते हैं कि इसे हमने मारा है। राज दशरथ प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही चारों भाईयों की नयनाभिराम आरती के साथ दूसरे दिन की लीला को विश्राम दिया जाता है।
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जाल्हूपुर की रामलीला :
चिरईगांव विकासखंड के टूड़ीनगर जाल्हूपुर में अति प्राचीन रामलीला में शुक्रवार को रामजन्म की लीला का मंचन हुआ। चारों तरफ मंगल गीत एवं सोहर गीतों से अयोध्या में खुशहाली का माहौल हो जाता है। महाराज दशरथ नगर वासियों को उपहार भेंट करते हैं। ब्राह्मणों को दान देते हैं।
इसके अलावा भगवान राम के साथ चारों भाइयों के बाल रूप के दर्शन व बाल क्रीड़ा का मनोहारी मंचन किया गया। जिसे देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। जाल्हूपुर में माह भर चलने वाली रामलीला श्री श्री 1008 रामरमी सरकार ने शुरू कराया था। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनके जेष्ठ पुत्र आनंद देव सरकार के सानिध्य में रामलीला होती है। व्यास की भूमिका शिवबालक मिश्रा निभा रहे हैं।