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Varanasi News: भगवान जगन्नाथ की पुरी बन गई बाबा विश्वनाथ की काशी

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नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने, बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः... का मंत्र शिव की नगरी काशी में गुंंजायमान हो उठा। शहर से लेकर गांव तक जय-जय जगन्नाथ... के साथ हर-हर महादेव... का जयकारा गूंजता रहा। 222 साल पुरानी परंपरा के साथ ही काशी का पहला लक्खा मेला रथयात्रा आरंभ हो गया। तीन दिनों के लिए शिव की नगरी काशी भगवान जगन्नाथ की पुरी में तब्दील हो गई। भगवान इंद्र ने भी भगवान के रथ के पहियों का अभिषेक किया। हल्की बारिश के बीच भीगते हुए भक्तों ने भगवान के दर्शन किए।
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रविवार को नाथों के नाथ जब सपरिवार रथ पर सवार होकर भक्तों के बीच पहुंचे तो रथयात्रा मार्ग मंदिर में तब्दील हो गया। भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्रजी के विग्रहों का पीत पीतांबर वस्त्रों के साथ ही पीले पुष्पों से शृंगार किया गया। भोर में 5.11 बजे पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने भगवान की मंगला आरती उतारी और रथ के पांच पग चलने के साथ ही तीन दिवसीय रथयात्रा मेले का श्रीगणेश हो गया। 14 पहियों वाले 21 फीट चौड़े और 18 फीट लंबे सुसज्जित रथ पर भगवान भक्तों को दर्शन दे रहे थे। भगवान के रथ के 20 फीट ऊंचे शिखर का भी भव्य शृंगार किया गया था। भगवान के मंदिर के पट जैसे ही खुले हाथों में तुलसी दल की माला, बेला की लड़ी, फल, परवल की मिठाई, केशरिया पेड़ा, नानखटाई, राजभोग, जगन्नाथी पान और मन में श्रद्धा लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। अपराह्न के बाद मेला क्षेत्र की सड़कें श्रद्धालुओं से भर गईं। मंदिर के आकार वाला रथ दूर से ही हर किसी को बरबस ही अपनी तरफ खींच रहा था। इस दौरान शैलेश शापुरी, आलोक शापुरी, संजय शापुरी, अखिलेश खेमका, करुणेश खेमका, अरविंद शर्मा, कृष्णा पांडेय, अभय सिंह मौजूद रहे।
भगवान की उतारी आरती, लगाया भोग
भोर में मंगला आरती के बाद भगवान को नौ बजे छौंका मूंग, चना, पेड़ा, गुड़ व देशी घी, चीनी का शरबत अर्पित किया गया। मध्याह्न में 12 बजे भोग व आरती के बाद मंदिर का पट बंद हो गया। मंदिर के भंडारे में निर्मित पूड़ी, कोहड़े की सब्जी, दही, देशी चीनी और कटहल-आम के अचार का भोग लगाया गया। अपराह्न तीन बजे आरती के साथ पुन: दर्शन आरंभ हुआ। रात में आठ बजे शाम की आरती हुई और रात्रि में 12 बजे आरती के बाद रथ का पट बंद हो गया।
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भगवान जगन्नाथ को गोद में लेकर कराया काशी की गलियों का भ्रमण



सुड़िया में रविवार को भगवान जगन्नाथ जी के विग्रह काे सलिल अग्रवाल के आवास में आसन पर विराजमान कराया गया। भगवान का सुगंधित फूलों से शृंगार और पूजन अर्चन विधि विधान से हुआ। सुनीता अग्रवाल ने खीर तुलसी एवं मिष्ठान का भोग अर्पित किया। सुड़िया स्थित मंदिर पर ऋषि दीक्षित, विकास दीक्षित, सौरभ और शिव दीक्षित ने शास्त्रोक्त विधि से पूजन कर भगवान की आरती की। यजमान सलिल अग्रवाल ने बताया कि सुड़िया में पिछले 125 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन होता रहा है। परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान स्वरूप जगत के नाथ को सुयश अग्रवाल ने गोद में उठाकर गलियों में भ्रमण कराते हुए रथ पर विराजमान कराया। रथयात्रा ठठेरी बाजार, चौक, राजा दरवाजा, काशीपुरा, जालपा देवी, कबीर चौरा, पिपलानी कटरा होते हुए धूपचंडी मंदिर जाकर समाप्त हुईं।



काशीराज परिवार के अनंत नारायण ने खींचा भगवान का रथ



राजातालाब में काशीराज परिवार के सदस्य अनंत नारायण सिंह ने दो पग रथ को खींचकर रथयात्रा मेले की शुरुआत की। रथयात्रा की शुरुआत रानी बाजार स्थित बलवंत सिंह विधि कॉलेज से हुई।



लोक कल्याण की कामना से उतारी भगवान जगन्नाथ की आरती



रथयात्रा मेले के पहले दिन नमामि गंगे ने भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा, बलभद्र जी की आरती उतारकर लोक कल्याण की कामना की। सदस्यों ने काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला के नेतृत्व में रथ के आसपास सफाई कर स्वच्छता को संस्कार के रूप में शामिल करने का संदेश दिया। रथयात्रा मेले में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं एवं पूजन सामग्री के दुकानदारों से पर्यावरण संरक्षण के लिए सिंगल यूज पॉलीथिन का उपयोग न करने की अपील की गई। श्रद्धालुओं में तुलसी के पौधे का वितरण किया गया। इस दौरान पुष्पलता वर्मा, सोनू, सुनीता देवी, सीमा अग्रवाल, किरण यादव मौजूद रहीं। इसी तरह नमामि गंगे और पतंजलि योगपीठ ने भी भगवान जगन्नाथ की भव्य आरती उतारी गई। जिला संयोजक शिवम अग्रहरि के संयोजन में भगवान जगन्नाथ को मिश्री, नान खटाई, पंचमेवा का भोग अर्पित कर तुलसी की माला व पुष्पहार चढ़ाया गया। इस दौरान रामप्रकाश जायसवाल, रेनू जायसवाल, जय विश्वकर्मा, अर्पणा जायसवाल, नीता रस्तोगी मौजूद रहीं।
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