इससे दैनिक उपयोग के स्मार्टफोन और लोरावन की मदद से माता-पिता द्वारा भीड़ भरे माहौल जैसे- कुंभ मेला आदि में बच्चों की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग आसानी से संभव हो जाएगी।
निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने कहा कि संस्थान की मौजूदा बहु-मंजिला इमारतों को लोरावन सक्षम स्मार्ट बिल्डिंग में बदला जा रहा है। इससे बिजली, पानी एवं गैस मीटर की स्वचालित रीडिंग, उपलब्ध वाहन पार्किंग स्थानों की जांच, कूड़ेदान की सफाई व निपटारे में मदद और बगीचों में स्वचालित पानी का छिड़काव करने में मदद मिलेगी।
प्राकृतिक आपदा में होगा बेहतर संचार
लोरावन तकनीक उत्तराखंड की बाढ़, चक्रवात ताऊते जैसी प्राकृतिक आपदाओं के मामले में भी कारगर सिद्ध होगी। आपदा के दौरान जहां संचार नेटवर्क के बुनियादी ढांचे पूरी तरह से ध्वस्त हो गए थे, वहां भी लोरावन एक त्वरित और संभावित संचार समाधान है। लोरावन अन्य देशों के उन पर्यटकों तक भी अपनी पहुंच बढ़ा देगा जिनके पास अपनी यात्रा के दौरान सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन नहीं है।
संस्थान डिवाइस डिजाइनिंग, गेटवे प्लेसमेंट और डिवाइस डिप्लोयमेंट और किसी भी सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले स्मार्टफोन के साथ इसे जोड़ा जा सकता है। इस शोध का मुख्य फोकस डिवाइस की लागत को एक किफायती लागत तक कम करना है जिसे भारतीय उपयोगकर्ता आसानी से चला सकें। आईआईटी बीएचयू परिसर में लोरावन पंजीकृत स्टार्टअप कंपनियों को अपने आईओटी उत्पादों को विकसित करने में भी मदद करेगा।