केस - 1
मैदागिन की रोशनी सेठ को पीठ में दर्द की शिकायत थी। चिकित्सक ने उन्हें एक्स रे कराने के लिए लिखा। वह बृहस्पतिवार को एक्सरे कराने के लिए तीन घंटे तक अस्पताल में भटकती रहीं, लेकिन एक्स-रे के लिए नंबर ही नहीं आया। अंत में उन्होंने टेक्नीशियन से संपर्क करना चाहा तो वहां पहले से मौजूद सिक्योरिटी गार्ड ने डांटते हुए कहा कि अब समय समाप्त हो चुका है, कल आना। उन्होंने इसकी शिकायत डॉ. बृजेश कुमार से भी की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अंतत: उन्हें प्राइवेट लैब से एक्सरे कराना पड़ा।
केस - 2
लल्लापुरा की साबिया खातून को हाथ में चोट लगी थी। आर्थो के चिकित्सक ने एक्सरे कराने के लिए भेजा, लेकिन दो घंटे लाइन में लगने के बाद भी एक्सरे नहीं हो पाया। मौके पर मौजूद गार्ड बोला, समय से आओ तो जांच होगी। कल सुबह आकर पर्चा जमा करना।
केस - 3
गाजीपुर के रहने वाले विकास गुप्ता को बहुत दिनों से पेट में दर्द की शिकायत थी। अस्पताल में चिकित्सक के परामर्श पर वह अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे। पर्चा जमा करने के 30 मिनट बाद जब उन्होंने अपने नंबर के बारे में पूछा तो सोनोलॉजिस्ट डॉ. स्वाति ने डांटते हुए कहा कि अभी बैठे रहो, जब नंबर आएगा, तो बुलाया जाएगा। इस संबंध में जब एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार यादव के पास शिकायत करने पहुंचे तो वहां एसआईसी के कमरे के बाहर मौजूद गार्ड ने भी बदतमीजी की।
अधिकारी बोले
अस्पताल में इस तरह की शिकायतें चिंताजनक हैं। अस्पताल में मरीजों या उनके परिजनों से दुर्व्यवहार करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। इस प्रकार की व्यवस्था की जांच की जाएगी, उसके बाद कार्यवाही की जाएगी। -डॉ. एनडी शर्मा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य विभाग