पिरामिड के आकार में हुआ है पिंड का निर्माण
यह कुंड अपनी अनूठी बनावट के लिए जाना जाता है। लगभग 50 फीट गहराई और 15 फीट चौड़ाई वाला यह जलाशय नीचे उतरते हुए उल्टे पिरामिड का आकार लेता है, जहां तीन दिशाओं से सीढ़ियां उतरती हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे सूर्य उपासना का दुर्लभ केंद्र माना गया है, जहां सौर ऊर्जा और मां गंगा के जल का अद्भुत संगम होता है।
गुप्तकाल से जुड़ा है इतिहास
लोलार्क कुंड का मूल ढांचा चौथी सदी (गुप्तकाल) का बताया जाता है। दसवीं शताब्दी में गहड़वाल नरेश गोविंदचंद्र और कालांतर में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने इसके जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण में अहम योगदान दिया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए इस प्राचीन विरासत स्थल को संवारने का कार्य कर रहा है।
अघोरपीठ पर भी लगा श्रद्धालुओं का तांता
लोलार्क षष्ठी पर रविंद्रपुरी स्थित क्रीं कुंड पर भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। स्नान और दर्शन-पूजन के लिए दूर-दराज से पहुंचे भक्तों की मौजूदगी से पूरा परिसर खचाखच भर गया। बाबा कीनाराम के जन्मोत्सव (कीनाराम षष्ठी) के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को क्रीं कुंड में विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तय है। सुबह परिसर में श्रमदान और स्वच्छता अभियान के बाद आरती संपन्न की जाएगी।
सुबह 8 बजे क्रीं कुंड के पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम सभी अघोरेश्वर संतों की समाधियों का विधिवत पूजन करेंगे। शाम को विचार गोष्ठी का मंच सजेगा। रात में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। पड़ाव स्थित अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम में सर्वेश्वरी समूह के तत्वावधान में सुबह सेवा कार्य और श्रमदान किया जाएगा। इसके उपरांत अघोराचार्य बाबा कीनाराम की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर आरती, सफलयोनि पाठ और महाप्रसाद वितरण का क्रम चलेगा।