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लोलार्क षष्ठी: गोद भरने की आस में भदैनी की सड़कों पर कटी रात, 3 किमी लंबी लाइन; डुबकी लगाएंगे 10 राज्यों लोग

Thu, 17 Sep 2026 05:47 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

लोलार्क षष्ठी पर भदैनी स्थित लोलार्क कुंड में आधी रात से पुण्य स्नान शुरू हो गया। संतान प्राप्ति की कामना लेकर श्रद्धालु रातभर सड़कों पर डटे रहे। कुंड में आस्था की डुबकी लगाने के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार लगी है। 10 राज्यों से पहुंचे करीब दो लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है। कुंड करीब 50 फीट गहरा है।
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लोलार्क कुंड में स्नान के लिए इंतजार में बैठीं महिलाएं। - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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काशी के भदैनी मोहल्ले में लोलार्क षष्ठी पर्व को लेकर देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। संतान और पुत्र रत्न की अभिलाषा लिए लगभग दो लाख भक्त लोलार्क कुंड पहुंचे हैं। आस्था का आलम यह है कि बुधवार की रात 12 बजते ही कुंड में स्नान का सिलसिला शुरू हो गया, जबकि ज्योतिषियों के मुताबिक बृहस्पतिवार की सुबह 6:31 से 10:26 बजे तक पूजा-अर्चना और स्नान का सबसे शुभ काल है।

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लोलार्क कुंड में आस्था की डुबकी लगाने के लिए यूपी, बिहार और झारखंड सहित 10 राज्यों से दंपती पहुंचे हैं। भदैनी से शिवाला तक तीन किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग की गई है। कुंड परिसर और बैरिकेडिंग के भीतर ही हजारों लोगों ने रात बिताई, ताकि शुभ मुहूर्त में डुबकी लगाने का अवसर न छूटे। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं।
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मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि दंपती एक साथ कुंड के पवित्र जल में तीन बार डुबकी लगाते हैं। स्नान संपन्न होते ही कुंड में एक फल समर्पित किया जाता है और भीगे वस्त्र वहीं छोड़ दिए जाते हैं। मान्यता है कि इससे पूर्व के समस्त कष्ट और ग्रह-बाधाएं छूट जाती हैं। इसके पश्चात श्रद्धालु लोलार्केश्वर महादेव की विधिवत पूजा कर वंश वृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।

पिरामिड के आकार में हुआ है पिंड का निर्माण
यह कुंड अपनी अनूठी बनावट के लिए जाना जाता है। लगभग 50 फीट गहराई और 15 फीट चौड़ाई वाला यह जलाशय नीचे उतरते हुए उल्टे पिरामिड का आकार लेता है, जहां तीन दिशाओं से सीढ़ियां उतरती हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे सूर्य उपासना का दुर्लभ केंद्र माना गया है, जहां सौर ऊर्जा और मां गंगा के जल का अद्भुत संगम होता है।

गुप्तकाल से जुड़ा है इतिहास
लोलार्क कुंड का मूल ढांचा चौथी सदी (गुप्तकाल) का बताया जाता है। दसवीं शताब्दी में गहड़वाल नरेश गोविंदचंद्र और कालांतर में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने इसके जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण में अहम योगदान दिया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए इस प्राचीन विरासत स्थल को संवारने का कार्य कर रहा है।
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अघोरपीठ पर भी लगा श्रद्धालुओं का तांता
लोलार्क षष्ठी पर रविंद्रपुरी स्थित क्रीं कुंड पर भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। स्नान और दर्शन-पूजन के लिए दूर-दराज से पहुंचे भक्तों की मौजूदगी से पूरा परिसर खचाखच भर गया। बाबा कीनाराम के जन्मोत्सव (कीनाराम षष्ठी) के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को क्रीं कुंड में विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तय है। सुबह परिसर में श्रमदान और स्वच्छता अभियान के बाद आरती संपन्न की जाएगी। 

सुबह 8 बजे क्रीं कुंड के पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम सभी अघोरेश्वर संतों की समाधियों का विधिवत पूजन करेंगे। शाम को विचार गोष्ठी का मंच सजेगा। रात में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। पड़ाव स्थित अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम में सर्वेश्वरी समूह के तत्वावधान में सुबह सेवा कार्य और श्रमदान किया जाएगा। इसके उपरांत अघोराचार्य बाबा कीनाराम की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर आरती, सफलयोनि पाठ और महाप्रसाद वितरण का क्रम चलेगा।
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