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बलिया में सजी लोकरस की महफिल, भोजपुरी गीतों की मिठास में झूमे श्रोता

Tue, 30 Oct 2018 01:39 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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कलाकारों के शानदार प्रस्तुति से सजी लोकरस की महफिल - फोटो : अमर उजाला
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बलिया के टाउन हॉल मैदान में रविवार की देर रात तक ‘लोकरस’  की बारिश होती रही। भोजपुरी को बढ़वा देने के लिए पहल सांस्कृतिक संस्थान मिश्रवलिया टू आइज फाउंडेशन तिखमपुर के संयुक्त प्रयास से आयोजित लोकरस -2018 कार्यक्रम में लोक गायकों ने श्रोताओं को मुग्ध किया। रंगबिरंगी रोशनी के बीच कार्यक्रम के पल पल का उपस्थित जन ने आनंद लिया। भोजपुरी गायिकी की विभिन्न विद्याओं की श्रोताओं ने सराहना की। भोजपुरी की नामचीन गायिका चंदन तिवारी ने बेहतरीन गायिकी पेश की। मंच पर विभिन्न विधाओं से जुड़े नाटक और लोकगायिकी को सुनने के लिए देररात तक श्रोता मौजूद रहे। श्रोताओं की तालियां पूरी रात गीतों पर बजती रही।        
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कार्यक्रम का शुभारंभ होने के बाद भोजपुरी कलाकारों ने एक से बढ़कर प्रस्तुति दी। सबसे पहले लोकगायक शैलेंद्र मिश्रा ने स्वागत गीत गाकर महफिल में आए अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद मंच पर देवी गीत के साथ आई लोकगीत गायिका सुनीता पाठक ने ‘गाई के गोबरे महादेव....’, और अंगनवां कागा बोले, मोर अंगनवा... सुनाया’ इसके बाद मंच पर आए राजीव राज ने नीमिया के डारी मइया... सुनाया। आशीष त्रिवेदी के निर्देशन में बेटी बचाओ लघु नाटिका प्रस्तुुत की गई।

इसके बाद रांची से पधारे कत्थक कलाकार विपुुल नायक ने टीम के साथ ‘उंगली में डसले बिया नगनिया ओ नंदी सइयां का बुला पर’ दर्शकों को काफी गुदगुदाया। ‘पिया मेहंदी लिया द मोती झील से’ पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। बोकारो झारखंड के पुरबिया तान फेम लोकगीत गायिका चंदन तिवारी ने भोजपुरी गीतों से समा बांध दिया।
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उन्होंने ‘जब 1857 के रार भइल’ सुनाया तो लोगों में देश भक्ति का जज्बा साफ झलकने लगा। इसके बाद उन्होंने ‘आंखों जैसा लाली नहीं है, गेहुआ के पीड़ी अइसन’ से कार्यक्रम को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। लखनऊ की संजोली पांडेय ‘सइया मोड़ पलटनिया बड़ा निक लागे इंडिया’ को बेहतरीन अंदाज में सुनाया। मुंबई से आई टीम युवान के कलाकार कवि सेठ शहनाई बांसुरी बाइक मोहनलाल एवं मनोहर लाल एवं मोहन  बीणा के जादूगर राघवेंद्र कुमार ने अपने गीत संगीत से पूरी महफिल को रंगीन बनाया। 
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लोकगायिकी में फुहड़ता की कोई जगह नहीं : चंदन तिवारी

लोक गायिका चंदन तिवारी - फोटो : अमर उजाला
लोकरस कार्यक्रम में शिरकत करने बोकारो से आयीं लोक गायिका चंदन तिवारी ने कहा कि भोजपुरी के पारंपरिक गीत आज भी जीवंत हैं। इसे ऐसे आयोजनों के माध्यम से बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषा में जो मिठास है, वह किसी भाषा में नहीं है। इसके प्रति समाज के कुछ लोगों में जो गलत धारणाएं हैं, उसे बदलने की जरूरत है। जब अच्छे गीत आएंगे तो लोगों की धारणाएं भी बदलेंगी। पारंपरिक और साहित्य से जुड़े गीतों को लोग आज भी पसंद करते हैं। यह बातें उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि लोक गायिकी में फूहड़पन की कोई जगह नहीं है। उन्होंने खुद कभी भी अपने गीत और लोकगायिकी में फूहड़ गीतों को स्थान नहीं दिया। चाहे इसके लिए उसे किसी प्रकार की परेशानी उठानी पड़ी हो। यहां तक कि आर्थिक सब्जबाग भी दिखाया गया। लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और अपने लीक को नहीं तोड़ा। बताया कि पारंपरिक गीतों और लोकगीतों के माध्यम से समाज में विलुप्त हो रही विधाओं को संजाया जा सकता है, जिसकी सराहना हर समाज के लोग करते हैं। बलिया को लेकर जो उनकी धारणा थी, वह यहां कार्यक्रम में लोगों का स्नेह देखकर बदल गई है। लोगों ने देर रात उत्साह के साथ लोकगीतों का आनंद लिया।
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