चुनावी महायज्ञ में मतदान की आहुति से लोकतंत्र मजबूत होता है। जिस तरह कोई महायज्ञ मातृशक्ति के योगदान के बिना अधूरा होता है, ठीक उसी तरह चुनावी महायज्ञ भी मातृशक्ति के सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता। इसलिए चुनावी महायज्ञ में मातृशक्ति को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
ये अपील महमूरगंज स्थित एक होटल में आयोजित मातृशक्ति संगोष्ठी में काशी की प्रबुद्ध महिलाओं ने की। उन्होंने 21 मई को काशी में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में होने वाले मातृ महाशक्ति सम्मेलन में बड़ी संख्या में हिस्सा लेने का निर्णय लिया।
महिलाओं ने कहा हम संकल्प लेते हैं कि अपने परिवार के हर सदस्य जो मतदाता हैं उन्हें मतदान के लिए जागरूक करेंगे। साथ ही पास पड़ोस और पूरे समाज को भी मतदान के लिए प्रेरित करेंगे। अध्यक्षता वरिष्ठ महिला चिकित्सक डॉ. विभा मिश्रा ने की।
संचालन कर रहे पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले ने कहा कि सनातन संस्कृति में मातृ शक्ति के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोई भी महाअनुष्ठान नारी शक्ति के बिना संपन्न ही नहीं हो सकता। ऐसे में मतदान में आधी आबादी के योगदान का महत्व बढ़ जाता है।
इस दौरान मुख्य वक्ता साहित्यकार नीरजा माधव, भाजपा की प्रदेश मंत्री अर्चना मिश्रा, बीएचयू महिला कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रीता सिंह, पूर्व पार्षद पूजा मोहले ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर रचना दुबे, इंदु सिंह, ममता द्विवेदी, भावना त्रिवेदी, निधि मेहरा, डॉ. नीलम ओहरी, सुषमा कोहली, सुधीर मिश्र, संजय राय आदि रहे।
दिव्यांगों ने रैली निकालकर मतदाताओं को किया जागरूक
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और किरण सोसाइटी माधोपुर के बैनर तले 100 से अधिक दिव्यांगों ने लंका स्थित मालवीय जी की प्रतिमा से अस्सी घाट तक मतदाता जागरूकता रैली निकाली। जागरूकता संबंधी स्लोगन और बैनर लिए मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर पर दिव्यांग लोगों को एक जून को घर से निकलकर मतदान करने की अपील कर रहे थे।
लंका थाने के उपनिरीक्षक मनोज कुमार यादव ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। रैली में कमलेश, राजेंद्रनाथ राय, नारायण सिंह, सतीश मिश्रा, लक्ष्मीदत्त उपाध्याय, सनोज, संदीप यादव, शमीम आदि शामिल रहे।
राष्ट्रमंदिर के निर्माण के लिए अधिक मतदान का लक्ष्य है जरूरी
कुटुंब प्रबोधन के प्रभारी एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री ओमपाल सिंह ने कहा कि यह समय तपती दुपहरी में घर बैठने का नहीं बल्कि अपने कर्तव्य का निर्वहन करने की है। उन्होंने कहा कि जनता-जनार्दन से संपर्क कर अधिक से अधिक मतदान करने का लक्ष्य प्राप्त करें। ताकि राष्ट्र मंदिर का पुनर्निर्माण हो सके।
वह रविवार को सुंदरपुर में अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र के सभागार में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से आयोजित लोकमत एवं मतदाता विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता करते हुए डॉ. दीनानाथ सिंह ने कहा कि कर्म से बड़ा कोई तप नहीं है और राष्ट्र निर्बाध रूप से प्रगति पथ पर चलता रहे इसके लिए अधिक से अधिक मतदान जरूरी है।
इस दौरान प्रो. अरुण कुमार राय, डॉ. बब्बन प्रसाद सिंह, डॉ. सुशीला राय, प्रो. प्रभात कुमार सिंह दीक्षित उपस्थित रहे। संचालन डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुमन सिंह ने किया।