फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: राजीव ने बगल में क्या बिठाया चुनाव ही हार गए पनिका... आज भी होती है पूर्व पीएम के इस भाषण की चर्चा

Sat, 06 Apr 2024 01:38 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

आदिवासी नेता राम प्यारे पनिका राजीव गांधी ने बगल में बैठने पर चुनाव हार गए थे। वर्ष 1989 के चुनाव में राजीव गांधी ने पनिका के समर्थन में धुंआधार प्रचार किया था। बावजूद रामप्यारे पनिका करारी हार की वजह से हैट्रिक लगाने से चूक गए थे। 
विज्ञापन
Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आदिवासी नेता रामप्यारे पनिका को सोनभद्र का विकास पुरुष भी कहा जाता है। ऊर्जांचल की ज्यादातर परियोजनाओं की स्थापना में उनका अहम योगदान रहा है। वह रॉबर्ट्सगंज सीट से दो बार सांसद रहे। सरलता, सादगी और जुझारू व्यक्तित्व वाले पनिका की गांधी-नेहरू परिवार से घनिष्ठता रही। यही कारण रहा कि उनके चुनाव प्रचार में खुद राजीव गांधी सोनभद्र आए थे।
विज्ञापन


वर्ष 1989 के चुनाव में राजीव गांधी ने पनिका के समर्थन में धुंआधार प्रचार किया था। बावजूद रामप्यारे पनिका करारी हार की वजह से हैट्रिक लगाने से चूक गए थे। पार्टी की आंतरिक गुटबाजी उनकी हार का कारण बनी।

वर्ष 1989 के चुनाव में भी माहौल पनिका के ही अनुकूल था। इस चुनाव में राजीव गांधी पनिका के समर्थन में प्रचार के लिए आए थे। इसके बाद घटनाक्रम ऐसा बदला कि मजबूत जनाधार वाले पनिका को हार का सामना करना पड़ा। 
विज्ञापन


उस चुनाव का जिक्र करते हुए तत्कालीन छात्र नेता व कांग्रेस के पदाधिकारी राजेश द्विवेदी बताते हैं कि राजीव गांधी ने शक्तिनगर में सभा की थी। मंच पर उनके साथ पं. लोकपति त्रिपाठी सहित कई अन्य नेता थे। राजीव ने सबको दरकिनार कर पनिका को अपने पास बुलाया। 

कद-काठी में छोटे पनिका को अपने समकक्ष बनाने के लिए मसनद लगवाकर बैठाया। लोकपति त्रिपाठी सहित कुछ अन्य नेता पीछे की कतार में चले गए। एक खेमे को यह बात नागवार लग गई। उसके बाद पार्टी के अंदरखाने में ही माहौल ऐसा बदला कि रामप्यारे पनिका को चुनाव में मुंह की खानी पड़ गई।

आज भी होती है राजीव के भाषण की चर्चा
कांग्रेस नेता राजेश द्विवेदी बताते हैं कि संसदीय सचिव रहे रामप्यारे पनिका की चुनावी सभा में राजीव गांधी ने पंचायतों में भ्रष्टाचार पर हमला बोला था। कहा, मुझे ज्ञात है कि केंद्र सरकार गांवों के विकास के लिए अगर एक रुपये भेजती है तो 20 पैसे ही पहुंच पाते हैं। 

 
विज्ञापन

शेष 80 पैसे का बीच में ही बंदरबांट हो जाता है। आगे से ऐसा न हो और गांव का समुचित विकास हो सके इसके लिए पंचायती राज व्यवस्था में आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। विकास का पैसा, आपके चुने गए प्रधान के खाते में सीधे पहुंचेगा और आप सब अपने गांव का विकास अपने तरीके से करा सकेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें