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Lok Sabha Election: वाराणसी में 80% युवाओं को राजनीतिक दलों के घोषणापत्र पर भरोसा नहीं, सर्वे में बताई खास बात

Tue, 30 Apr 2024 12:16 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी जिले में सात शैक्षिक संस्थानों के शिक्षक और छात्रों की मदद से 4000 युवाओं के बीच सर्वे किया गया। इस दौरान 60 फीसदी युवाओं ने माना कि नोटा को वोट देना बेकार है। वहीं 70 फीसदी युवा प्रत्याशी के चेहरे को महत्वपूर्ण मानते हैं। 
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Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी शहर के 80 फीसदी युवाओं को राजनीतिक दलों के घोषणापत्र पर भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि घोषणापत्र के वादे सिर्फ लुभावने होते हैं। उन्हें पूरा नहीं किया जाता है। 60 फीसदी युवा ऐसे हैं, जो नोटा पसंद नहीं करते हैं। वे कहते हैं, जब नोटा विजेता घोषित नहीं हो सकता तो इसका कोई मतलब नहीं है। हमें मुखर होकर हमारे मुद्दों को जनप्रतिनिधियों के सामने रखने चाहिए और किसी न किसी प्रत्याशी को ही वोट देना चाहिए। 40 फीसदी युवा मानते हैं कि नोटा मतदाताओं के लिए ताकतवर हथियार है।

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अमर उजाला ने शहर सात शैक्षिक संस्थानों के शिक्षक और छात्रों के साथ मिलकर युवाओं से लोकसभा चुनाव के मुद्दों पर बात की है। 25 से 29 अप्रैल के बीच करीब 4000 युवाओं से अलग-अलग मुद्दे पर बात की गई। इससे पता चला कि 20 फीसदी युवा राजनीति में कॅरिअर नहीं बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे परिवारवाद और जातिवाद को दोषी ठहराते हैं।

युवाओं का कहना है कि बड़े नेताओं के घर जन्म लेने वाले ही राजनीति की ऊंचाई पर पहुंचते हैं। जन्म के साथ ही सीट व चुनाव का क्षेत्र तय हो जाता है। फिर चाहे वह योग्य हो या नहीं। राजनीति भी अब रुपयों पर आधारित रह गई है। जाति फैक्टर काम करता है। हर राजनीतिक दल जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर ही टिकट का बंटवारा करता है।

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नोटा को वोट क्यों दें, राजनीतिक दलों से सवाल करिए

40 फीसदी युवा नोटा को मतदान के लिए हथियार मानते हैं। वे कहते हैं, इसे और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। हालांकि 60 फीसदी युवा नोटा को वोट नहीं देना चाहते हैं। वे कहते हैं नोटा के जरिये नाराजगी जताई जा सकती है, लेकिन जीत-हार नहीं तय किया जा सकता है। राजनीतिक दलों के सामने अपने मुद्दे रखें। जब वोट मांगने आएं तो निडर होकर सवाल करें। 70 फीसदी युवा पार्टी से अधिक प्रत्याशी के चुनाव पर जोर देते हैं।

उनका कहना है कि प्रत्याशी की छवि और जनता के बीच उसका स्वभाव वोट का आधार होता है। कई बार राजनीतिक दल का विरोध नहीं होता है, लेकिन प्रत्याशी के विरोध के चलते पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है।

रोजगार, सीमा सुरक्षा पर हो काम
रोजगार के मुद्दे पर लगभग सौ फीसदी युवा एक राय हैं। उनका कहना है कि रोजगार ही प्रमुख मुद्दा होना चाहिए। राजनीतिक दलों को इस ओर प्रमुखता से काम करना चाहिए। वैकेंसी आए तो समय से उसका परिणाम आए और उसमें भ्रष्टाचार न हो, यह सुनिश्चित होना चाहिए। पिछले दस साल में स्टार्टअप पर काम हुआ है मगर अभी इस दिशा में बहुत काम होना बाकी है। युवाओं को बैंक ऋण अभी भी आसानी से नहीं मिलता है। कुछ ही सफल स्टार्टअप हैं बस। सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर भी सभी एकमत हैं। उनका कहना है कि इसमें कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।
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इन संस्थानों के विद्यार्थियों ने लिया सर्वे में हिस्सा

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, काशी विद्यापीठ, सम्पूर्णानंद संस्कृत विवि, यूपी कॉलेज, हरिश्चंद्र कॉलेज, बसंत कन्या महाविद्यालय और आर्य महिला पीजी कॉलेज।

सवाल, जो पूछे गए
  • मतदान के समय आपके दिमाग में क्या रहता है, प्रत्याशी, पार्टी, मुद्दा।
  • बेरोजगारी मुद्दे पर सरकार के स्तर से कोई काम हुआ है क्या।
  • राष्ट्रीय स्तर पर आपके लिए क्या बड़ा मुद्दा है।
  • चुनावी वादों पर आप क्या कहेंगे।
  • क्या आप राजनीति में करियर बनाने को सोचते हैं कभी।
  • नोटा को कितना महत्वपूर्ण मानते हैं आप।
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