मोदी ने भदोही के साथ फूलपुर लोकसभा क्षेत्रों का नाम लेते हुए पूर्वांचल भर में भाजपा को जिताने का आह्वान किया, लेकिन मंच पर मौजूद दोनों प्रत्याशियों का नाम नहीं लिया। इसके पीछे मोदी और भाजपा हाईकमान की रणनीतिक मंशा चाहे जो रही हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस मसले के सियासी निहितार्थ जरूर निकाले जाने लगे हैं।
चर्चा तेज हो गई कि 15 वर्षों तक बसपा में विधायक रहने के बाद इस बार के लोकसभा चुनाव से चंद दिनों पहले भदोही लोकसभा के रणक्षेत्र में उतारने के लिए भाजपा में शामिल हुए रमेशचंद्र बिंद को अपने प्रदर्शन के बूते भदोही की जनता के साथ-साथ भाजपा हाईकमान के दिल पर भी छाना होगा।
जनसभा में मोदी की हुंकार कितनी असरकारक हुई, यह तो 23 मई को मतगणना के बाद पता चलेगा, लेकिन अलमऊ की धरती से भदोही और फूलपुर दो लोकसभा क्षेत्रों को साधने का उन्होंने पूरा प्रयास किया।