चुनाव प्रचार के अंतिम दिन आजमगढ़ में प्रस्तावित अखिलेश यादव की चारों सभाएं निरस्त कर दी गईं। सपा और प्रशासन के बीच अलग ही आरोप-प्रत्यारोप जारी है। जहां एक तरफ सपा के जिलाध्यक्ष निर्वाचन अधिकारी पर आरोप लगा रहे हैं, वहीं निर्वाचन अधिकारी ने आरोप का खंडन किया।
10 मई को छठे चरण के चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। लेकिन अंतिम दिन आजमगढ़ में प्रस्तावित अखिलेश यादव की चारों सभाएं निरस्त कर दी गईं जिसे लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं। आजमगढ़ के सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा, सभी जानते हैं कि आजमगढ़ गठबंधन का अजेय गढ़ है।
हार की हताशा में सत्ता के दबाव में निर्वाचन से जुड़ी संस्थाओं, खासतौर से जिला प्रशासन तकनीकी दृष्टि से चुनाव को रद्द करने का बहाना ढूंढ रहा है। इसीलिए प्रचार समाप्त होने में दो दिन शेष रहते चुनाव मद में होने वाले खर्च की पूर्व निर्धारित दरों को संशोधित कर दिया गया है।
सत्ता और प्रशासन की दुरभि संधि की आशंका के चलते 10 मई को सपा अध्यक्ष व लोकसभा प्रत्याशी अखिलेश यादव के आजमगढ़ में प्रस्तावित जनसभाओं को निरस्त कर दिया गया है।
गौरतलब है कि अखिलेश यादव को सगड़ी, आजमगढ़ सदर, गोपालपुर, व मेहनगर विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक सभा करनी थी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल वेंकटेश्वर लू ने बताया कि चुनाव खर्च की दरों में संशोधन जिला निर्वाचन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र का विषय है।