जिले भर में लोहिया आवास के आवंटन और निर्माण में व्यापक पैमाने पर घपलेबाजी उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच तो शुरू करा दी है लेकिन जांच टीम की मंशा पर ही सवाल उठने लगे हैं। शुक्रवार को जिला विकास अधिकारी रमाकांत तिवारी के नेतृत्व में बरनी गांव में जांच करने टीम पहुंची तो हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। शिकायतकर्ताओं और ग्राम प्रधान एवं सचिव के बीच नोकझोंक भी हुई। ग्रामीणों ने जांच अधिकारी पर तथ्यों को नजरंदाज करने और घपले में शामिल लोगों को बचाने का आरोप लगाया।
लोहिया गांव बरनी में दोपहर बाद जिला विकास अधिकारी ने अपनी टीम के साथ पहुंचकर पड़ताल शुरू की। सबसे पहले जांच टीम ने लोहिया आवास की लाभार्थी दुखना देवी के पति विजयी पाल को बुलाया। विजयी ने जांच अधिकारी को साफ शब्दों में बताया कि उनके आवास का निर्माण ग्राम प्रधान ठेके पर करवा रहे हैं। इस पर ग्राम प्रधान और सचिव ने कहा कि विजयी की दिमागी हालत ठीक नहीं है।
इस बात पर शिकायतकर्ताओं और प्रधान एवं सेक्रेटरी के बीच जमकर नोकझोंक हुई। उसके बाद टीम सपा नेता निहाला पाल के घर गई। निहाला ने जांच अधिकारी के समक्ष स्वीकार किया कि पूर्व में उनकी पत्नी को इंदिरा आवास मिला था। वहीं, बहू नंदनी को लोहिया आवास आवंटित कराने के मामले में उन्होंने कहा कि मेरा बेटा कोर्ट मैरिज कर अलग रह रहा है। हमारा बेटे-बहू से कोई लेना-देना नहीं है।
इसके बाद जांच अधिकारी ने पक्का मकान और कार होने के बावजूद लोहिया आवास का लाभ लेने वाली छबिराजी के घर गए। पड़ोसी शिकायत करते रहे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। वहीं, टीम ने दो अन्य लाभार्थी दुखना और रीनू के बैंक खातों से ईंट भट्ठा मालिक के खाते में रुपये ट्रांसफर होने के मामले की जांच किए बिना लौट गई, जिस पर शिकायतकर्ता ने नाराजगी जाहिर की।
गांव के आशाराम पांडेय, अनिल सिंह, धर्मेंद्र कुमार पांडेय, दिवाकर पांडेय, राजकुमार मौर्या आदि का कहना था कि जांच अधिकारी आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। पक्के मकान, गाड़ी और लाभार्थिर्यों के खातों से धन ट्रांसफर कराने के साथ ठेके पर आवास निर्माण जैसे प्रमाण सामने हैं लेकिन जांच टीम इन्हें नजरंदाज कर रही है।