बैंक से धोखाधड़ी कर रुपये निकालने के 26 वर्ष पुराने मामले में आरोपित साड़ी कारोबारी को अदालत से राहत मिली। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) अजय प्रताप की अदालत ने सिगरा के लाहौरी टोला निवासी राजकुमार कपूर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक (लेखा एवं प्रशासन) राम शरण श्रीवास्तव ने 10 मार्च 2000 को दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
आरोप था कि राज सिल्क इंडस्ट्रीज के पार्टनर राजकुमार कपूर और जयनाथ मिश्रा ने बिहार की परवलपुर शाखा से चोरी हुए कोरे बैंक ड्राफ्ट का उपयोग कर बैंक ऑफ बड़ौदा, गोदौलिया शाखा में जमा कर लगभग 66,550 रुपये की धोखाधड़ी की। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आरोप सिद्ध न होने पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
अपर जिला जज-6, आलोक कुमार की अदालत ने दहेज हत्या के मामले में बरजी थाना, फूलपुर निवासी पति राहुल, ससुर प्रेमचंद और सास धनशीरा देवी को दोषी पाते हुए 14-14 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अभियोजन के अनुसार, ठठेर ढेरातर रामपुर, जनपद जौनपुर निवासी वादी अशोक कुमार गुप्ता ने 20 अक्तूबर 2020 को फूलपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पुत्री सुनीता का विवाह लगभग तीन वर्ष पूर्व बरजी थाना, फूलपुर निवासी राहुल के साथ हुआ था। विवाह के कुछ ही दिन बाद से ससुराल पक्ष के लोग दहेज की मांग करने लगे और सुनीता के साथ मारपीट भी शुरू कर दी। घटना से करीब छह माह पहले पंचायत भी हुई थी, जिसमें ससुराल पक्ष ने प्रताड़ित न करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उत्पीड़न जारी रहा।
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20 नवंबर 2020 को सुबह करीब सात बजे राहुल ने अपने पिता को फोन कर सूचना दी कि सुनीता की मौत हो गई है और फांसी लगाने की बात कही। वादी ने आरोप लगाया कि दहेज की मांग को लेकर ससुराल पक्ष ने उसकी पुत्री की हत्या की। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना कर तीनों आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद तीनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।