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कोर्ट का सख्त फैसला: मूक-बधिर किशोरी से दुष्कर्म मामले में दोषी को उम्रकैद, 50 हजार रुपये लगा जुर्माना

Sat, 18 Jul 2026 11:40 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में पॉक्सो कोर्ट ने पांच साल पुराने मामले में सख्त फैसला सुनाया। मूक-बधिर किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : adobestock
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विस्तार
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विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट एवं अपर जिला जज नितिन पांडेय की अदालत ने 17 वर्षीय मूक-बधिर किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी विजय सोनकर (48) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। दोषी ने अगस्त 2021 में किशोरी के साथ दुष्कर्म किया था। दोषी विजय सोनकर पेशे से सब्जी विक्रेता है और भेलूपुर थाना क्षेत्र के अस्सी का निवासी है।

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विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह के अनुसार, घटना 24 अगस्त 2021 को दोपहर करीब दो बजे हुई थी। विजय सोनकर ने पीड़िता की शारीरिक दिव्यांगता का फायदा उठाते हुए टिनशेड वाले घर में उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के चाचा ने 31 अगस्त 2021 को भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में दुष्कर्म के अलावा घटना का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर वायरल करने और विरोध करने पर गाली-गलौज करने का भी आरोप लगाया गया था।

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अभियोजन पक्ष ने छह मौखिक गवाह और 11 दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। इनमें पीड़िता, उसके चाचा, चिकित्सक और एक विशेष शिक्षिका के बयान शामिल थे। अभियुक्त ने खुद को निर्दोष बताते हुए एक लाख रुपये के उधार का दावा किया, जिसे न्यायालय ने आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। 

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न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 42 के तहत गंभीर सजा के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए दोषी को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

अन्य आरोपों से दोषमुक्त
दुष्कर्म के अलावा दोषी पर घटना का वीडियो वायरल करने और मारपीट करने का भी आरोप था। हालांकि, न्यायालय ने तकनीकी कारणों से वीडियो वायरल करने के आरोप से उसे दोषमुक्त कर दिया। वहीं, मारपीट के पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उस आरोप से भी बरी कर दिया। न्यायालय ने पीड़िता को आर्थिक सहायता प्रदान करने का भी आदेश दिया है। दोषी पर लगाए गए कुल अर्थदंड का 70 फीसदी हिस्सा पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा। साथ ही, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
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