जरायम जगत के शातिरों के लिए अपने सफेदपोश मददगारों से कारतूस पाने की राह अब और आसान हो गई है। एक तरह से कारतूस का जखीरा उनकी ‘मुट्ठी’ में आ गया है।
पुलिस महकमे में भी अंदरखाने इसे लेकर बेचैनी बढ़ी हुई है लेकिन सार्वजनिक तौर पर नियम-प्रावधानों का हवाला देते हुए हर हाल में कारतूसों का दुरुपयोग रोकने के दावे किए जा रहे हैं।
दरअसल, पुलिस की यह बेचैनी बढ़ी है आर्म्स एक्ट 2016 के लागू होने से। इसके तहत लाइसेंसी असलहाधारी अब साल भर में 200 कारतूस ले सकेंगे जबकि पहले महज 25 कारतूस ही मिल पाते थे।
पिछले साल के आखिरी महीनों में ही आर्म्स एक्ट 2016 लागू हो गया था लेकिन उसके बाद विधानसभा चुनाव आ गया। सभी लाइसेंसी असलहे थानों के मालखाने में जमा करा लिए गए और आर्म्स एक्ट में हुए बदलावों की ओर किसी की नजर नहीं गई।
पिछले महीने से जब जमा कराए गए असलहों को रिलीज किया जाने लगा और उसके बाद कलेक्ट्रेट में नए प्रावधानों के तहत कारतूसों के लिए ट्रेजरी चालान शुरू हुआ तब पुलिस के कान खड़े हुए। इस प्रावधान के तहत अब चाहे लाइसेंसी पिस्टल, रिवाल्वर या रायफल, बंदूक रखने वाले हों, सभी एक बार में सौ कारतूस और साल भर में दो सौ खरीद सकते हैं।
बता दें कि इससे पहले पिस्टल और रिवाल्वर रखने वाले एक बार में 10 और साल भर में 25 कारतूस खरीद सकते थे। वहीं, रायफल और बंदूक रखने वाले एक बार में 10 और साल भर में सौ कारतूस खरीद सकते थे। थानों से असलहे रिलीज कराने के बाद कलेक्ट्रेट पहुंच रहे लाइसेंसी पांच सौ रुपये का ट्रेजरी चालान जमा कर असलहा बाबू से दो सौ कारतूस खरीदने की अनुमति आसानी से ले रहे हैं।
तेजी से बढ़ते अपराध के बीच सरकार के इस निर्णय से पुलिस महकमे में खासी हलचल है। एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के तेजतर्रार दरोगाओं से बात की गई तो उनका कहना था कि लाइसेंसी असलहाधारियों को खरीदे गए कारतूस का 80 प्रतिशत खोखा जमा करना पड़ता है लेकिन उसमें भी खूब खेल होता है।