फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Leopard Terror: तीन साल है तेंदुए की उम्र, बिहार से आया वाराणसी; 50 से अधिक वन पुलिसकर्मी कर रहे पहरेदारी

Tue, 27 May 2025 02:30 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी के चिरईगांव में तेंदुएं का आंतक जारी है। यहां तकरीबन 20 हजार लोग दहशत के साए में जी रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों काे घर से बहुत जरूरी होने पर ही निकलने दिया जा रहा है। वहीं, पुलिस और वन विभाग की टीम काॅम्बिंग कर रही है।
विज्ञापन
तेंदुए के हमले के बाद माैके पर माैजूद पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Leopard Terror in Varanasi: चिरईगांव क्षेत्र में चार दिन से दहशत का पर्याय बने तेंदुए की उम्र 3 साल है। वह नदी के रास्ते बिहार से चंदौली होते हुए वाराणसी आया है। हालांकि वन विभाग के कैमरे में तेंदुआ अभी तक रिकॉर्ड नहीं हुआ है। वन विभाग ने लोगों के बचाव के लिए वन पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। 

विज्ञापन




लोगों की सुरक्षा को देखते हुए क्षेत्र को चारों तरफ से जाल से घेर दिया गया है। साथ ही रेस्क्यू टीम द्वारा पिंजड़ा लगा दिया गया। यह जानकारी प्रभागीय वनाधिकारी स्वाति श्रीवास्तव ने दी।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि इससे पहले वाराणसी में तेंदुआ 2009 में देखा गया था। उसकी उम्र तीन साल से ज्यादा थी। ग्रामीणों को डरने की जरूरत नहीं है। वन विभाग की टीम क्षेत्र में मौजूद है। नदी के किनारे 12 गांवों की पहचान कर ग्राम प्रधान से बात की गई। वर्तमान में पिंजड़े, जाल, सुरक्षा उपकरण के साथ वन विभाग की टीम तैयार है। इसके साथ ही विशेष टीम बनाकर निगरानी कराई जा रही है।

यह भी पढ़ें: दिन से रात तक कॉम्बिंग, छह गांवों के लोग लाठियां लेकर पहरा दे रहे; दहशत में 20 हजार जिंदगियां

इधर, चार दिन से चिरईगांव इलाके में तेंदुए की दहशत बनी हुई है। लोग घरों में छुपकर बैठे हैं। घर के बड़े लोग बच्चों के साथ घर के बाहर बैठकर पहरा दे रहे हैं। तेंदुए ने तीन अलग-अलग गांवों में तीन ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। फिलहाल तेंदुआ नजर नहीं आ रहा है, लेकिन गांव में खौफ का माहौल अब भी बना हुआ है। 

विज्ञापन

सर्च ऑपरेशन जारी

वन विभाग की तरफ से चिरईगांव, गौराकला, रुस्तमपुर, बरियासनपुर, संदहा सहित 12 से अधिक गांवों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन अभी तक वन विभाग को भी तेंदुआ नजर नहीं आया है। विभाग उसके पैरों के निशान पर उसकी पहचान कर रहा है। साथ ही तीन शिफ्टों में 50 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। ग्रामीण इलाकों में ट्रैप कैमरे लगाकर तेंदुए की तलाश शुरू कर दी है। वहीं, चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने तेंदुए के हमले में घायल लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल लिया।

तेंदुए के डर से किसान और मजदूर खेतों में काम करने नहीं जा रहे हैं। फल और फूलों की फसलें खराब हो रही हैं और बच्चे कोचिंग नहीं जा रहे हैं। शाम को खेल मैदान में भी कोई नहीं जा रहा है। डोर टू डोर ठेला पर सब्जी बेचने वाले भी अपना कारोबार बंद कर चुके हैं। 

लोग अपने पशुओं को घरों में बांधने को मजबूर हैं और खेतों में गोल बनाकर हाथ में लाठी डंडा लेकर जा रहे हैं। ढाब क्षेत्र के मोकलपुर, रामचंदीपुर, गोबरहा, अम्बा छितौना आदि गांवों में सोता और गंगा किनारे तेंदुएं के पैरों के निशान व लोकेशन जानने का प्रयास होता रहा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें