इस घटना ने स्थानीय लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया, क्योंकि आमतौर पर हिंदू समुदाय के लोग मजारों पर चादर चढ़ाने जाते हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय का मंदिर में इस तरह आस्था व्यक्त करना दुर्लभ माना जा रहा है।
बताते चलें कि महामंडलेश्वर धाम और शिव सरोवर को पुराणों में वर्णित आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि, कार्तिक पूर्णिमा और सावन मास में यहां मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से भक्त और व्यापारी आते हैं।
मुस्लिम परिवार की इस आस्था ने स्थानीय लोगों के बीच एक नई मिसाल कायम की है। लोगों का कहना है कि यह घटना धर्म और समुदाय की सीमाओं को तोड़कर आस्था की एकता का प्रतीक है। अनवर और उनके परिवार की भक्ति ने न केवल धाम की महिमा को और बढ़ाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सच्ची श्रद्धा किसी धर्म की मोहताज नहीं होती।