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Varanasi News: हिंदी की धरोहर काशी की सृजन-परम्परा विषयक पर दिया व्याख्यान

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पं. विद्यानिवास मिश्र के जन्म शताब्दी समारोहों के तहत बुधवार को राजकीय पुस्तकालय अर्दली बाजार में साहित्यिक संघ एवं विद्याश्री न्यास के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी की धरोहर काशी की सृजन-परंपरा विषयक शृंखलाबद्ध व्याख्यान हुआ। साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि आज हिंदी के धरोहर कार्यक्रम में जिन दो वरिष्ठ साहित्यकारों लक्ष्मी नारायण मिश्र एवं वासुदेव शरण अग्रवाल पर चर्चा हो रही है, वह दोनों भारत भारतीय परंपरा एवं संस्कृति के गहन अधिकता एवं सृजनकर्ता थे।
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बीएचयू के शोधार्थी सर्वेश मिश्रा ने कहा कि लक्ष्मी नारायण मिश्र हिंदी के ऐसे पहले आधुनिक नाटककार हैं जिन्होंने अपने नाटकों में परंपरा से बुद्ध और कबीर की बौद्धिकता की आधुनिक समाज की समस्याओं के उद्घाटन में वसूली इस्तेमाल किया है। ऋषभ पांडेय ने कहा कि वासुदेव शरण अग्रवाल भारतीय संस्कृति के अनुपम व्याख्याता थे। अध्यक्षता करते हुए डॉ. अत्रि भारद्वाज ने कहा कि वासुदेव शरण अग्रवाल ने हिंदी गद्य को एक नई दिशा दी और भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने रखा। डॉ. संजय पंकज ने काव्यांजलि के अंतर्गत अपने लोकगीत सुना कर लोगों का को प्रभावित किया। संचालन अंजली मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन सोच विचार पत्रिका के संपादक नरेंद्र नाथ मिश्रा ने किया। समारोह में डॉ. (मेजर) अरविंद कुमार सिंह, ओम धीरज, हिमांशु उपाध्याय, प्रो प्रकाश उदय मौजूद रहे।
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