आम जन सुविधाओं, शिकायतों के साथ ही शहर के विकास पर चर्चा करने और योजनाएं बनाने के लिए आयोजित होने वाली नगर निगम मिनी सदन की बैठकें अक्सर हो-हल्ला और हंगामे तक सिमट कर रह जा रही हैं।
वजह, विकास के मसलों पर फोकस के बजाय कभी दलगत राजनीति तो कभी आपसी खींचतान। स्मार्ट सिटी, एलईडी, मेट्रो रेल परियोजना और विद्युत सुधार की आईपीडीएस जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर चर्चा के लिए भी मिनी सदन के जनप्रतिनिधियों के पास फुर्सत नहीं।
इसके अलावा, सीवर, पेयजल, साफ-सफाई जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़े मसलों पर भी मिनी सदन कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है। जबकि, पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के साथ ही काशी के विकास के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कोशिशें चल रही हैं। काशी-क्योटो समझौते के साथ ही काशी के विकास से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक बड़ी योजनाएं घोषित की जा चुकी हैं। सोमवार को हंगामे के बीच महज दस मिनट में बैठक स्थगित कर दी गई...।