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काशी, अयोध्या और गोरखपुर में स्लीपिंग मॉड्यूल तैयार कर रहा लश्कर का आतंकी

Thu, 29 Aug 2019 02:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, वाराणसी
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आतंकवाद - फोटो : FILE PHOTO
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आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काशी, अयोध्या और गोरखपुर में स्लीपिंग मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं। इसकी जिम्मेदारी नेपाल के जनकपुर जिले के धनसरा में रह रहे बिहार के मधुबनी जिले के बलकटवा निवासी आतंकी मोहम्मद उमर मदनी को सौंपी गई है। 

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तैयारियों को मूर्त रूप देने के लिए मार्च और मई में मदनी ने नेपाली मूल के एक युवक के साथ काशी सहित अन्य स्थानों पर ठहर कर कुछ खास लोगों से मुलाकात की थी। खुफिया एजेंसियों को मिले इस इनपुट के आधार पर स्थानीय पुलिस और अभिसूचना इकाई को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की ताकीद की गई है।

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार जम्मू-कश्मीर और समुद्री सीमा के साथ ही नेपाल के रास्ते भी देश में आतंकी प्रवेश कर सकते हैं। आतंकवादियों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी, गोरखपुर और अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर स्लीपिंग मॉड्यूल तैयार कर उनके सहारे आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश है। 
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खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के अनुसार  14 मार्च और 22 मई को उमर मदनी की काशी में मौजूदगी का इनपुट मिला था। बताया जाता है कि मदनी काशी की अलग-अलग धर्मशालाओं में सामान्य तरीके से ठहरा था। इस संबंध में पूछे जाने पर एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि पुलिस हमेशा सतर्कता के साथ ड्यूटी करती है। खुफिया एजेंसियों के महत्वपूर्ण इनपुट के आधार पर हम अतिरिक्त सतर्कता बरतते हैं।

2016 में छूटा तो नेपाल के जनकपुर में खोला हॉस्टल
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार लगभग 15 साल पहले यूएस डॉलर और पाकिस्तान निर्मित पांच लाख रुपये के जाली भारतीय नोटों के साथ मदनी नई दिल्ली में पकड़ा गया था। जांच एजेंसियों ने माना कि मदनी टेरर फंडिंग के लिए रुपये देश में लेकर आया था। लगभग 10 साल की सजा काटने के बाद 2016 में मदनी छूटा तो नेपाल के जनकपुर जिले के धनसरा में हॉस्टल चलाने लगा। इस बीच मदनी और लश्कर-ए-तैयबा के बीच संपर्क का सिलसिला जारी रहा। साथ ही, मदनी का नेपाल से सटे तराई क्षेत्रों व गोरखपुर, अयोध्या और बनारस लगातार आना-जाना लगा रहता है।

पिता के कारण मदनी का बनारस से है खास कनेक्शन
मदनी के पिता समशुल हक उर्फ छोटे मौलाना बनारस में 1969 से 1978 तक एक मदरसे में शिक्षक थे। खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार पिता के साथ मदनी भी बचपन में बनारस में रहा है और कुछेक लोगों से उसके करीबी ताल्लुकात हैं। उन्हीं लोगों और उनके माध्यम से नवयुवकों से मुलाकात करने के लिए मदनी बनारस आता-जाता रहता है। मदनी को पकड़ने के लिए कई बार जाल बिछाया गया, लेकिन पुलिस और खुफिया इकाइयों को सफलता नहीं मिली। उधर, बिहार पुलिस के अनुसार मदनी मौजूदा समय में फरार घोषित है और उसकी तलाश कई एजेंसियां कर रही हैं।

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