घायल से मिलने अस्पताल पहुंचे डीएम
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हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी एस राजलिंगम मौके पर पहुंचे और निरीक्षण के दौरान एडीएम सिटी व पुलिस अधिकारियों से जानकारी ली। इसके बाद सीधे अस्पताल पहुंचे और घायल मजदूर का हाल जाना और डॉक्टर से उसकी स्थिति के बारे में पूछा। उन्होंने मृतक के घरवालों को सूचना देने का निर्देश दिया। परिवार को आर्थिक सहायता आदि उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जा रही है। दोनों मजदूर ब्लाक चिरईगांव, गांव राजापुर थाना चौबेपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं।
वीडीए उपाध्यक्ष ने मौके की जांच की
वीडीए उपाध्यक्ष अभिषेक गोयल ने भी घटना स्थल पर पहुंचकर मौके पर मौजूद लोगों से निर्माण कार्य की जानकारी ली। जिस पुराने मकान की मरम्मत कराई जा रही थी, उसी के पास एक और पिलर खड़ाकर मकान बनवाया जा रहा था। वीडीए उपाध्यक्ष ने मौजूद विभागीय टीम से निर्माण कार्य की जांच कराने को कहा।
वाराणसी नगर निगम की ओर से साल 2022 में ही जर्जर भवनों को चिह्नित किया गया। इसमें सभी जोनल क्षेत्रों को मिलाकर कुल 404 भवन ऐसे हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। लापरवाही का आलम यह है कि इन भवनों के चिन्हांकन के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। चेतगंज में मकान के मरम्मत के दौरान हुए हादसे में एक बार फिर नगर निगम की लापरवाही उजागर हुई है।
जिले में पिछले दो महीनों में दो बड़े हादसे भवन गिरने के कारण हुए हैं। इन घटनाओं के बाद भी नगर निगम, विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। नगर निगम की सूची के अनुसार सबसे अधिक 189 जर्जर भवन कोतवाली जोन में हैं। इसी प्रकार दशाश्वमेध जोन में 143, आदमपुर जोन में 18, भेलूपुर जोन में 14 और वरुणापार जोन में कुल 40 भवन हैं।
हाल ही में मकानों के गिरने से हुए जानलेवा हादसों के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई खास पहल होती नहीं दिख रही है। प्रशासन हादसों का शिकार हुए लोगों के परिजनों को केवल मुआवजा बांट कर औपचारिकता पूरी करता दिख रहा है। यदि इन भवनों पर कार्रवाई नहीं हुई आगामी दिनों में ऐसे और भी अप्रत्याशित हादसे होने की संभावनाएं हैं।