कात्यानी देवी का दर्शन पूजन। अमर उजाला
- फोटो : संगठन
वासंतिक नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मंगलवार को ललिता गौरी और मां कात्यायनी के दर्शन हुए। भक्तों ने मां को पुष्पों का हार चढ़ाया और श्रद्धा भक्ति से शृंगार कर मनोवांछित फल की कामना की। इन मंदिरों में शयन आरती तक दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही।
वासंतिक नवरात्र में षष्ठी तिथि पर मां ललिता गौरी के दर्शन पूजन करने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन मां के दर्शन-पूजन से जीवन में यश, कीर्ति और वैभव में वृद्धि होती है। ललिता घाट पर स्थित मां ललिता गौरी मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त में करीब चार बजे मां का पंचामृत स्नान कर नवीन वस्त्र धारण कराया। आभूषण और सुगंधित पुष्पों से शृंगार किया गया। मंगला आरती के बाद दर्शन के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए। मां के जयकारे के साथ दर्शन का क्रम रात 11 बजे शयन आरती तक चला। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। भोर से मध्याह्न तक भीड़ का दबाव सबसे अधिक रहा। उधर, चौक क्षेत्र में स्थापित मां कात्यायनी मंदिर में भी दर्शन पूजन के लिए भीड़ रही।
कात्यानी देवी का दर्शन पूजन। अमर उजाला- फोटो : संगठन