किसान जानजागरण यात्रा कचहरी अंबेडकर चौराहे से होकर शास्त्री घाट पहुंची।
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बिहार के चंपारण से दो अक्तूबर को शुरू हुई किसान जन जागरण पदयात्रा बुधवार को वाराणसी के शास्त्री घाट पर सभा के बाद समाप्त हुई। भारतीय किसान यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा की 350 किलोमीटर की 19 दिवसीय पदयात्रा में काफी भीड़ उमड़ी। लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन के दौरान हुई किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार के बाद प्रदेश के सभी जिलों में इनकी अस्थियां भेजी गई थीं। जिनमें से वाराणसी जिले के हिस्से की अस्थियां गंगा में प्रवाहित की गई।
पदयात्रा के संयोजक हिमांशु तिवारी ने बताया कि पदयात्रा पूर्वी चंपारण, मोतिहारी, मलमालिया, माझी घाट, सीताब्दियरा, बलिया, रसड़ा, कासिमाबाद, गाजीपुर, नंदगंज, सिधौना होते हुए बनारस पहुंची। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गारंटी, तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने सहित 10 सवालों के जवाब सरकार से मांगे गए। मंच पर नव निर्माण किसान संगठन के संयोजक अक्षय कुमार, रामधीरज, सुनील, रामजनम, फादर आनंद, राहुल सहित यूपी, बिहार और ओडिसा के सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
मुस्तैद रही पुलिस, ड्रोन से हुई निगरानी
पदयात्रा के आगमन और सभा के दौरान वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस मुस्तैद रही। चप्पे चप्पे पर पुलिस कर्मी तैनात रहे। वहीं, सभा स्थल की ड्रोन से निगरानी की गई। ताकि किसी भी तरह की अनहोनी पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।