वाराणसी। सरायगोवर्धन निवासी पिशाचमोचन के तीर्थ पुरोहित कृष्णकांत उपाध्याय और उनकी पत्नी ममता की हत्या में चार नहीं छह बदमाश शामिल थे। घटनास्थल के आसपास मौजूद रहे लोगों से पूछताछ के आधार पर यह जानकारी पुलिस टीमों ने जुटाई है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी राजेंद्र और उसके बेटे रजत के हाथ में पिस्टल थी। राजेंद्र की पत्नी पूजा और तीन अन्य आरोपियों के हाथ में चापड़ जैसा धारदार हथियार था।
उधर, शनिवार की दोपहर से रविवार की देर रात तक वारदात के मुख्य आरोपी राजेंद्र के 17 करीबियों से पुलिस टीमों ने पूछताछ की। हालांकि चारों नामजद आरोपियों में से किसी एक का भी पता नहीं लगा। नामजद चारों आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमों की छापेमारी बनारस, गाजीपुर, बलिया और बिहार के बक्सर, भभुआ सहित अन्य जिलों में जारी है। पुलिस प्रकरण के नामजद आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की तैयारी में है।
चेतगंज थाना अंतर्गत सरायगोवर्धन मुहल्ले में पिशाचमोचन के तीर्थ पुरोहित कृष्णकांत और उनकी पत्नी ममता को शनिवार की सुबह गोली मार कर और चापड़ से वार कर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान उपाध्याय दंपति के बेटे सुमित को भी लक्ष्य कर फायरिंग की गई लेकिन वह बाल-बाल बच गया। उपाध्याय दंपति की हत्या के आरोप में उनके छोटे भाई राजेंद्र उपाध्याय उर्फ छोटका बच्चा, भतीजे राजन, भयोह पूजा और रामविचार उपाध्याय के खिलाफ चेतगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
सुमित के अनुसार उसके मां-बाप की हत्या पुश्तैनी मकान में कब्जा करने के लिए और पिशाचमोचन कुंड स्थित बाबा की गद्दी पर एकाधिकार के लिए उसके चाचा, चचेरे भाई, चाची और उनके हिस्ट्रीशीटर नौकर ने की है। सिगरा और चेतगंज थाने की पुलिस के साथ ही खासतौर से लल्लापुरा चौकी इंचार्ज ने इस मामले में सतर्कता बरती होती तो उसके मां-बाप की हत्या नहीं होती।
उधर, पुलिस के अनुसार वारदात में राजेंद्र के नौकर, रामविचार उपाध्याय का बेटा और उनका एक पट्टीदार भी शामिल था। दोनों के बारे में घटनास्थल और आसपास के लोगों से पूछताछ में जानकारी मिली है। इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि पुलिस की तफ्तीश और छापेमारी जारी है। वारदात में नामजद आरोपियों के साथ ही साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।
दंपति की अर्थी उठी तो डबडबा उठी मुहल्ले के लोगों की आंखें
तीर्थ पुरोहित दंपति की अर्थी सरायगोवर्धन स्थित उनके घर से रविवार सुबह नौ बजे के लगभग मणिकर्णिका घाट के लिए निकली तो उनके दोनोें बेटों का बिलखना देख मुहल्ले के लोगों की आंखें भी डबडबा उठीं। मुहल्ले के लोग भी कृष्णकांत के छोटे भाई और उसकी पत्नी व बेटे को कोसते नजर आए। सभी का कहना था कि राजेंद्र ने अनर्थ कर दिया। उधर, कृष्णकांत के दोनों बेटों के करुण क्रंदन से पूरे सरायगोवर्धन और उससे सटे कालीमहाल मुहल्ले का माहौल भी गमगीन था। मणिकर्णिका घाट पर मां-बाप के शव को मुखाग्नि बड़े बेटे सुमित उर्फ पवन ने दी।
दोनों भाइयों को मुहैया कराए गए गनर, फोर्स तैनात
तीर्थ पुरोहित दंपति की हत्या के बाद उनके दोनों बेटों सुमित और विनीत को प्रशासन की ओर से सरकारी गनर दिए गए हैं। वहीं, सरायगोवर्धन स्थित उनके आवास पर पुलिस और मुहल्ले में पीएसी तैनात की गई है। पुलिस ने कृष्णकांत उपाध्याय के घर के इर्द-गिर्द सौ मीटर के दायरे में लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली।
लापरवाही के आरोप में लल्लापुरा चौकी इंचार्ज निलंबित
कृष्णकांत के पुत्र सुमित ने शनिवार को एसएसपी को बताया था कि यदि उसकी शिकायतों के आधार पर लल्लापुरा चौकी इंचार्ज ने कार्रवाई की होती तो उसके मां-बाप की हत्या नहीं होती। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने रविवार को बताया कि लापरवाही बरतने के आरोप में लल्लापुरा चौकी इंचार्ज राजकुमार वर्मा को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
हत्या के बाद शव की हुई दुर्गति, पोस्टमार्टम में लगे छह घंटे
वाराणसी। अपने छोटे भाई और भतीजे सहित अन्य बदमाशों की पिस्टल से निकली गोली से जान गंवाने वाले तीर्थ पुरोहित दंपति की मौत के बाद भी दुश्वारियों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। दंपति की मौत के बाद शव की खासी दुर्दशा हुई और सरकारी लापरवाही की वजह से पोस्टमार्टम करने में छह घंटे से ज्यादा का समय लग गया।
बदमाशों ने ममता उपाध्याय के सीने के अलावा कमर में चार गोली मारी थी। वह चार गोलियां छिटक कर आंतों और उनके आसपास के शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंच गई थी। बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस में ममता के शरीर में लगी गोलियाें का पता नहीं लगा तो शनिवार की देर रात उनके शव को एक्स-रे के लिए मंडलीय अस्पताल भेजा गया। मंडलीय अस्पताल में एक्स-रे के बाद ममता का शब दोबारा लाया गया तो लगभग छह घंटे से ज्यादा समय बाद सुबह चार बजे पोस्टमार्टम खत्म हुआ। इसी तरह बीते नौ सितंबर को सारनाथ क्षेत्र की वृद्धा नारंगी देवी की हत्या हुई थी। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर में लगी गोली नहीं मिली तो शव को एक्स-रे के लिए मंडलीय अस्पताल भेजा गया और घंटों समय लगा। इसे लेकर बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद पुलिस अफसरों का कहना था कि यहां भी एक्स-रे मशीन की व्यवस्था होनी चाहिए। चीड़-फाड़ के बाद शव को मंडलीय अस्पताल ले जाने और फिर वापस बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस लेकर आने में खासी परेशानी होती है। ऊपर से क्षतविक्षत शव की दुर्दशा अलग से होती है।