समर्थक भाजपा विधायक कृष्णानंद राय का पोस्टमार्टम कराने के लिए ही नहीं तैयार हो रहे थे लेकिन किसी तरह से पुलिस ने उन्हें समझा कर मनाया था। इस दौरान गुस्साए समर्थकों को काबू कर पाना पुलिस के लिए खासा मुश्किल साबित हुआ था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां निकाली गई थीं। पोस्टमार्टम के बाद भाजपा विधायक और अन्य छह लोगों का शव गाजीपुर जिला स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया गया था।
भाजपा विधायक की अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट के लिए निकली तो पांच किलोमीटर से ज्यादा लंबा जनसैलाब उमड़ा था। भाजपा विधायक की शवयात्रा के चलते वाराणसी-गाजीपुर मार्ग दिन भर जाम की जद में रहा था।
गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा के विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की गूंज पूर्वांचल के साथ ही बिहार और नई दिल्ली तक सुनाई दी थी। सनसनीखेज हत्याकांड के विरोध में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा समय में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जिला मुख्यालय पर 14 दिन तक धरने पर बैठे थे।
तत्कालीन सपा सरकार प्रदेश की पुलिस की जांच रिपोर्ट को सही ठहरा रही थी और भाजपा पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने पर अड़ी थी। इस दौरान जिला मुख्यालय पर राजनाथ सिंह का धरना खत्म कराने आए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि वह न्याय के लिए जनता के पास जाएंगे।