फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महादेव को प्रसन्न करने का रामबाण उपाय है रुद्राभिषेक

Tue, 11 Jul 2017 07:15 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजीपुर
विज्ञापन
महामंडलेश्वर ने रुद्राभिषेक के महत्व पर प्रकाश डाला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति महाराज ने कहा कि महादेव को प्रसन्न करने का रुद्राभिषेक रामबाण उपाय है। रुद्राभिषेक कर शिव से मनचाहा वरदान पाया जा सकता है। शिव के रुद्र रूप को अभिषेक बहुत प्रिय है।
विज्ञापन


यह बातें उन्होंने गाजीपुर जिले के सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर चातुर्मास व्रत के दौरान चल रहे रुद्राभिषेक महायज्ञ में रुद्राभिषेक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कही।     उन्होंने कहा कि भगवान शिव सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन रुद्राभिषेक उन्हें सबसे अधिक प्रिय है।

कहते हैं कि रुद्राभिषेक से शिवजी को प्रसन्न कर असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा सकते हैं। ऐसे में रुद्राभिषेक करके सरलता पूर्वक शिव कृपा के भागी बन सकते हैं। रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं।
विज्ञापन


शिवजी की कृपा से सारे ग्रह, बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है। शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। वैदिक विद्वानों द्वारा रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ के साथ सावन में रुद्राभिषेक करना ज्यादा शुभ होता है।

महामंडलेश्वर ने कहा कि भगवान शिव बहुत ही सरलता से प्रसन्न होने वाले भगवान हैं। इनके इन्हीं स्वभाव के चलते इन्हें भोलेनाथ कहते हैं। रुद्राभिषेक कोई भी कष्ट या ग्रहों की पीड़ा दूर करने का सबसे सरल उपाय है। उ
 

चातुर्मास माह में विष्णु की आराधना से मिलेगी पापों से मुक्ति

महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति महाराज - फोटो : अमर उजाला
महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति महाराज  ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करें तो सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा गुरुवार को उपवास और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाना भी लाभप्रद होता है। 

स्कंदपुराण के अनुसार संसार में मनुष्य जन्म और विष्णु भक्ति दोनों ही दुर्लभ है लेकिन चार्तुमास में भगवान विष्णु का व्रत करने वाला मनुष्य ही उत्तम एवं श्रेष्ठ माना गया है।

चौमासे के इन चार मासों में सभी तीर्थ, दान, पुण्य और देव स्थान भगवान विष्णु जी की शरण लेकर स्थित होते हैं तथा चातुर्मास में भगवान विष्णु को नियम से प्रणाम करने वाले का जीवन भी शुभफलदायक बन जाता है।

चातुर्मास व्रत के तहत मिट्टी के बने द्वादश पार्थिव ज्योतिर्लिंगों पर काशी से आए 21 प्रकांड वैदिक विद्वानों की ओर से किए जा रहे रुद्राभिषेक महायज्ञ के प्रमुख आचार्य पंडित रामशंकर द्विवेदी ने कहा कि इस बार श्रावण मास की शुरुआत सोमवार से हो रही है और सावन का समापन भी सोमवार से ही हो रहा है। 
विज्ञापन

इस सावन में बन रहा बड़ा दुर्लभ संयोग

shiva
श्रावण मास शिव आराधना के लिए सबसे पवित्र माह माना जाता है। श्रावण मास की सोमवारी का विशेष धार्मिक महत्व होता है।  ऐसे में इस बार श्रावण माह के दौरान पांच सोमवारी ने इस बार के पवित्र श्रावण माह के महत्व को और भी बढ़ा दिया है। इस बार चंद्र मास और सूर्य मास दोनों ही गणना के अनुसार श्रावण में पांच सोमवारी होना एक बड़ा दुर्लभ संयोग है और यही बजह है कि फल प्राप्ति के दृष्टिकोण से भी इस बार के श्रावण मास का ख़ास महत्व बताया जा रहा है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें