500 से ज्यादा मठ हैं मूलगादी से जुड़ेलहरतारा तालाब पर नीरू और नीमा को मिला नन्हा बालक नीरू टीला पर पला, ज्ञानी बना और कबीर कहलाया। नीरू टीला आज कबीरचौरा मूलगादी मठ है। आचार्य लाल साहब ने मूलगादी मठ की देश भर में 365 शाखाएं स्थापित की थीं। उनमें से दो सौ मठों के पास संपत्तियां है। इनका संचालन मूलगादी पीठ ही करती है।
इसके अलावा पांच सौ से ज्यादा मठ हैं जो मूलगादी से जुड़े हैं। इसकी शाखाएं पाकिस्तान में भी हैं। 1989 में मूलगादी के महंत अमृत साहब का देहांत होने के बाद गंगाशरण शास्त्री महंत बने और विचारदास को उत्तराधिकारी बनाया। 1999 में महंत गंगाशरण शास्त्री ने विवेक दास को महंत बनाया। 2023 में महंत विवेक दास ने प्रमोद दास को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
औरंगजेब ने संत कबीर की देह जगह मिले पुष्प से बनी मजार और समाधि के लिए गोरखपुर के सहजनवा में पांच-पांच सौ बीघा जमीन दी थी। मठ के स्वामित्व वाली समाधि के पास अब दो सौ बीघा भूमि और 100 बीघे का तालाब बचा है। काफी जमीन साधुओं ने बेची भी हैं। बिहार में पटना के सिकंदरपुर और नालंदा के बहादुरपुर में सिकंदर लोदी, समस्तीपुर के सतमलपुर में अकबर ने मठ को जमीन दी थी। आरा, सहरसा, गया, बलिया के करनई, सारनाथ, अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा और उसके समीप के डामौर, उड़ीसा में पुरी सहित तमाम स्थानों पर धर्मशालाएं, मठ और कृषि भूमि है।
कबीर प्राकट्य स्थल लहरतारा के महंत गोविंद दास शास्त्री और कबीरचौरा मूलगादी के महंत विवेकदास में भी संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मठ को कब्जे से मुक्त किया गया। महंत गोविंद दास शास्त्री ने कहा कि जमीन पर भू-माफिया कब्जा करना चाहते हैं।
पूर्वांचल में 300 मठ और मंदिर में चल रहा विवाद
पूर्वांचल के मठ मंदिरों में गद्दी का विवाद कई पीढि़यों से चला आ रहा है। तीर्थ पुरोहितों और संत समाज के अनुसार पूर्वांचल में लगभग 300 मठ और मंदिर हैं, जहां गद्दी का विवाद चल रहा है। कुछ मामले कोर्ट में हैं तो कुछ संत समाज के पास भी लंबित हैं। इसे देखते हुए कई मंदिरों में पारी की व्यवस्था की गई है।