काशी में मकर संक्रांति का पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। इस वर्ष पतंग बाजार ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, बीते एक सप्ताह के भीतर जिले में पतंग, मांझा, परेता और पतंगबाजी से जुड़ीं सामग्रियों का कुल कारोबार 50 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। आलम यह रहा कि संक्रांति की पूर्व संध्या से लेकर बृहस्पतिवार सुबह तक दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रही।
शहर के प्रमुख पतंग बाजारों, औरंगाबाद, दालमंडी, मैदागिन, महमूरगंज समेत कई जगहों पर खरीदारी का जबरदस्त माहौल रहा। कारोबारी असलम खान ने बताया कि इस बार चीनी मांझा बैन होने के कारण लोगों में देसी मांझे के प्रति खास रुझान दिखा। कई सामाजिक संगठनों ने भी बड़े पैमाने पर देसी मांझे और पतंगों की खरीदारी की।
पतंग व्यापारी रमेश कुमार ने बताया कि इस साल के पतंग उत्सव में ऑपरेशन सिंदूर थीम वाली पतंगों ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके साथ ही, राजनीतिक माहौल का असर भी आसमान में साफ दिखाई दिया। कई पतंगबाज अपने पसंदीदा नेताओं की तस्वीरों वाली पतंगों के साथ पेंच लड़ाते नजर आए। तिरंगे के रंगों वाली और देशभक्ति के नारों वाली पतंगों से पूरा आसमान सतरंगी हो उठा।